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मुतवल्ली विवाद में बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पूर्व मुतवल्ली नए मुतवल्ली को तुरंत सौंपें प्रभार, वरना होगी दंडात्मक कार्रवाई

मुतवल्ली विवाद में बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पूर्व मुतवल्ली नए मुतवल्ली को तुरंत सौंपें प्रभार, वरना होगी दंडात्मक कार्रवाई

 

बिलासपुर/पेंड्रा: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने अंजुमन इस्लामिया जामा मस्जिद कमेटी, पेंड्रा के प्रबंधन और रिकॉर्ड सौंपने के विवाद में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

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न्यायालय ने संबंधित अनुविभागीय अधिकारी एवं तहसीलदार को निर्देश दिया है कि वे पूर्व मुतवल्ली से मस्जिद से जुड़े सभी आवश्यक रिकॉर्ड, खाते और दस्तावेज नव-निर्वाचित मुतवल्ली को सौंपना सुनिश्चित करें।

 

याचिकाकर्ता मो. शहाबुद्दीन को 13.09.2025 को अंजुमन इस्लामिया जामा मस्जिद कमेटी, पेंड्रा (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) के मुतवल्ली/प्रबंधक के रूप में निर्वाचित घोषित किया गया था।

14.01.2026 को नव निर्वाचित समिति के पंजीकरण और मान्यता के बाद भी, पूर्व मुतवल्ली मो. यूसुफ पिता स्व. मोहम्मद अय्यूब ने प्रभार, अभिलेख और संपत्तियां सौंपने से साफ इनकार कर दिया।

 

प्रशासन द्वारा पूर्व में कई आदेश जारी किए गए, जिनमें 23.01.2026 और 05.02.2026 (एसडीएम द्वारा) के आदेश शामिल हैं, जिनमें पंद्रह दिनों के भीतर प्रभार सौंपने का अनिवार्य निर्देश दिया गया था। बार-बार नोटिस जारी होने के बावजूद पूर्व मुतवल्ली अनुपस्थित रहे और उन्होंने प्रशासन के साथ सहयोग नहीं किया, जिसके बाद 04.02.2026 को पंचनामा भी तैयार किया गया था।

 

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिट याचिका (डब्ल्यूपीसी क्रमांक 2267, 2026) दायर कर अदालत से निम्नलिखित मांगें की थीं:

एसडीएम के आदेशों (23.01.2026 और 05.02.2026) को तत्काल लागू कर पूर्व मुतवल्ली से संपत्तियों का भौतिक कब्जा लिया जाए।

 

रिकॉर्ड बरामदगी के लिए पुलिस बल के प्रयोग सहित सभी आवश्यक दंडात्मक कदम उठाए जाएं।

 

वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 68(3) के तहत प्रतिवादी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा शुरू करने का निर्देश दिया जाए।

 

आधिकारिक दस्तावेज़ में दिए गए निर्देशों के अनुसार विधिवत् चार्ज का लेनदेन करना अनिवार्य है। यदि आदेशानुसार प्रभार नहीं सौंपा जाता है, तो अधिनियम 1995 (यथा संशोधित 2025) की धारा 68 के तहत 6 माह के कारावास की सजा अथवा जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।

 

इस मामले का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने तहसीलदार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे 05.02.2026 को एसडीएम द्वारा पारित आदेश का कड़ाई से पालन कराएं। तहसीलदार को यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने और हर संभव प्रयास करने को कहा गया है कि पूर्व मुतवल्ली से अभिलेख, खाते और संबंधित समस्त रिकॉर्ड प्राप्त कर कानून के अनुसार नए मुतवल्ली को सौंप दिए जाएं।

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