सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले के कटंगपाली (बोंदा) क्षेत्र में डोलोमाइट का अवैध उत्खनन अब केवल चोरी नहीं, बल्कि सिस्टम के सीने पर मूंग दलने जैसा हो गया है। यहाँ कानून का खौफ किस कदर खत्म हो चुका है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन की जप्ती की कार्रवाई भी माफिया के बुलंद हौसलों को पस्त नहीं कर पाई। चर्चा है कि सुरेन्द्र मिरि नामक व्यक्ति के नेतृत्व में यहाँ डोलोमाइट का काला साम्राज्य फल-फूल रहा है, जहाँ पोकलेन मशीनें और ट्रैक्टरों का काफिला दिन में धड़ल्ले से शासन के राजस्व को लूटने में व्यस्त है।
प्रशासनिक तमाचा: जप्त मशीन छूटी और माफिया ने फिर गाड़ दिया झंडा
क्षेत्र में यह सवाल हवा की तरह तैर रहा है कि आखिर माफिया की जड़ें कितनी गहरी हैं? कुछ समय पूर्व सारंगढ़ एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए यहाँ से पोकलेन मशीन जप्त की थी। कायदे से इस पर ऐसी कार्रवाई होनी थी कि दोबारा कोई खनिज संपदा की तरफ आँख उठाकर न देख सके, लेकिन हुआ इसके उलट। मशीन छूटते ही माफिया ने दोगुने उत्साह के साथ अवैध खनन का काम शुरू कर दिया। यह सीधे तौर पर उन ईमानदार अधिकारियों के गाल पर तमाचा है जो सिस्टम को सुधारना चाहते हैं। सवाल उठता है कि क्या नियम-कायदे सिर्फ कागजों के लिए हैं या माफिया के रसूख के आगे नतमस्तक होने के लिए?
खनिज विभाग की रहस्यमयी चुप्पी: आखिर डर है या ‘सांठ-गांठ’?
सबसे बड़ा सवाल उस विभाग पर है जिसे खनिज संपदा की रक्षा के लिए सरकार तनख्वाह देती है। कटंगपाली की धूल और डस्ट में जब अवैध उत्खनन का तांडव चल रहा है, तब खनिज विभाग के जिम्मेदार अफसर अपने वातानुकूलित केबिनों में बैठकर किस ‘फाइल’ का इंतज़ार कर रहे हैं? शिकायतें मिलने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर ‘हाथ-पांव फूलना’ कई संदेहों को जन्म देता है। क्या विभाग के पास माफिया के सवालों का जवाब नहीं है, या फिर ‘ऊपर’ तक पहुंच रखने वाले माफिया की धमक ने विभाग की कलम की स्याही सुखा दी है?
कलेक्टर साहिबा, आपके ‘हंटर’ का इंतज़ार है!
जब विभाग मूकदर्शक बन जाए और माफिया बेखौफ हो जाए, तब आखिरी उम्मीद जिले के मुखिया से होती है। नव-पदस्थ कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। क्या वे उन क्रेशरों पर शिकंजा कसेंगी जहाँ बिना रॉयल्टी का यह अवैध पत्थर खपाया जा रहा है? शासन को लाखों का चूना लगाने वाले इस सिंडिकेट पर कब ‘रॉयल्टी चोरी’ का बड़ा मामला दर्ज होगा?
जनता देख रही है कि क्या प्रशासन इस अवैध सुरेन्द्र के खनन क्षेत्र पर कब तक कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पाता है या फिर कटंगपाली की संपदा यूँ ही लुटती रहेगी। जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।