सैकड़ों ट्रैक्टर, मशीनों की गूंज और कार्रवाई पर उठते सवाल, अब नई कलेक्टर की परीक्षा
सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के कटंगपाली पंचायत अंतर्गत महुआपाली इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वजह सिर्फ खनन नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र को लेकर उठ रहे सवाल हैं, जिसके बीच कथित तौर पर अवैध उत्खनन का खेल लगातार बेखौफ जारी है।
क्षेत्र में हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि मानो महुआपाली अब गांव कम और “खनिज माफियाओं का ऑपरेशन जोन” ज्यादा बन चुका हो। पहाड़ियों के आसपास दिन-रात पोकलेन मशीनों की आवाज गूंज रही है, जबकि सैकड़ों ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है। ग्रामीण तक तंज में कहने लगे हैं कि कटंगपाली अब ट्रैक्टरों का गढ़ बन चुका है, जहां लगभग हर घर किसी न किसी रूप में इस खनिज चक्र से जुड़ा नजर आता है।
सबसे गंभीर चर्चा आदिवासी जमीनों को लेकर हो रही है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि जिन जमीनों की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की है, उन्हीं इलाकों में कथित तौर पर खनन गतिविधियां धड़ल्ले से जारी हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर आदिवासी क्षेत्रों में इतनी बड़ी गतिविधियों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की नजर अब तक वहां क्यों नहीं पहुंची?
इसी बीच हाल ही में जिले के एक बड़े राजनीतिक पदाधिकारी के महुआपाली पहुंचने और खनिज कारोबार से जुड़े लोगों के साथ बैठक की चर्चाओं ने पूरे मामले को और गर्मा दिया है। गांव और राजनीतिक गलियारों में अब यह फुसफुसाहट तेज हो गई है कि आखिर यह बैठक सिर्फ सामान्य मुलाकात थी या फिर खनिज कारोबार को “सुरक्षित माहौल” देने की रणनीति?
लोगों के बीच यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि जब क्षेत्र में सैकड़ों ट्रैक्टर, भारी मशीनें और लगातार परिवहन गतिविधियां साफ दिखाई दे रही हैं, तो फिर कार्रवाई का पहिया आखिर क्यों जाम पड़ा हुआ है।
पूर्व कलेक्टर संजय कन्नौजे के कार्यकाल में भी महुआपाली और आसपास के क्षेत्रों में खनिज गतिविधियों को लेकर कई बार सवाल उठे, समाचार प्रकाशित हुए, शिकायतें हुईं, लेकिन कोई बड़ी और निर्णायक कार्रवाई सामने नहीं आ सकी। अब जिले में नई महिला कलेक्टर की पदस्थापना के बाद पूरे मामले पर लोगों की नजरें टिक गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नई कलेक्टर के सामने महुआपाली सिर्फ एक गांव का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति की पहली बड़ी परीक्षा बन चुका है। क्योंकि यहां सवाल सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि उस कथित संरक्षण तंत्र का भी है, जिसकी चर्चा अब खुलेआम होने लगी है।
महुआपाली में इन दिनों एक व्यंग्यात्मक चर्चा खूब सुनाई दे रही है “यहां पहाड़ कम कट रहे हैं, सिस्टम ज्यादा घिस रहा है।”
अब देखने वाली बात यह होगी कि नई प्रशासनिक टीम इस पूरे मामले में सख्ती दिखाती है या फिर महुआपाली की मशीनें पहले की तरह लगातार गूंजती रहेंगी और फाइलों में कार्रवाई का धुआं उड़ता रहेगा।