सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के टीमरलगा स्थित सर्वमंगला क्रेशर को लेकर उठे अवैध खनन और बिना वैध पत्थर स्रोत के संचालन के आरोप अब सीधे मुख्यमंत्री निवास तक पहुंच चुके हैं। पत्रकार संजय चौहान द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई लिखित शिकायत पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने 20 अप्रैल 2026 को कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ के नाम आधिकारिक पत्र जारी कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री सचिवालय से पत्र जारी होने के लगभग 20 दिन बाद भी जिले में किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई, जांच या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया था कि टीमरलगा क्षेत्र में संचालित सर्वमंगला क्रेशर में वैध खदानों से रॉयल्टी युक्त पत्थर के बजाय अवैध स्रोतों से पत्थर लाकर क्रेशिंग कार्य किया जा रहा है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि इस संबंध में पूर्व में जिला खनिज कार्यालय को लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री सचिवालय से जारी पत्र क्रमांक 2500726010927 / मु.मि.नि. / 2026 में स्पष्ट रूप से कलेक्टर को आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई कर जानकारी जनदर्शन पोर्टल में दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद यदि अब तक जांच शुरू नहीं हुई या कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दे रही, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जिले में अवैध खनन और क्रेशर संचालन को किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त है?
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में यह भी कहा था कि अवैध पत्थरों के उपयोग से शासन को प्रतिदिन भारी राजस्व हानि हो रही है और बिना स्रोत सत्यापन के क्रेशर संचालन पूरे राजस्व तंत्र पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। साथ ही शिकायत में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और स्टॉक, रॉयल्टी पर्ची एवं पत्थर स्रोत का भौतिक सत्यापन कराने की मांग भी की गई थी।
अब बड़ा सवाल यही है कि जब मुख्यमंत्री सचिवालय से सीधे निर्देश जारी हो चुके हैं, तब भी जिला प्रशासन की चुप्पी आखिर क्यों बनी हुई है? क्या मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, या फिर मामला किसी प्रभावशाली संरक्षण के कारण ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है?
फिलहाल क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जिला प्रशासन आखिर कब तक कार्रवाई करता है या फिर यह शिकायत भी केवल सरकारी फाइलों तक सीमित रह जाएगी।