चांपा। नगर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए नगर पालिका परिषद चांपा ने 1 सितंबर को दोपहर 3 बजे थाना चांपा में एसडीएम की अध्यक्षता में विशेष बैठक बुलाई है। नगर पालिका के पत्र क्रमांक 1643 में बाजार, मुख्य मार्ग और गली-मोहल्लों में दुकानदारों द्वारा सामान नाली के ऊपर तथा सड़क पर रखे जाने से आम नागरिकों के आवागमन में बाधा का हवाला दिया गया है।

लेकिन इस बैठक के लिए चुनी गई जगह ही अब सवालों के घेरे में आ गई है। जिस कक्ष में बैठक आयोजित की गई है, उसमें मुश्किल से 25 से 30 लोगों के बैठने की क्षमता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि, पुलिस, नगर पालिका के अधिकारी और संबंधित पक्षों की मौजूदगी अपेक्षित है, तो इतने सीमित स्थान में बैठक की व्यवस्था कैसे ? ऐसे में लोग वहां पहुंच रहे हैं , और उल्टे पैर वापस हो रहे।
पहले बैठक की व्यवस्था तो ठीक कर लेते!
नगर की यातायात व्यवस्था सुधारने निकले नगर पालिका प्रशासन से अब लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि जिस प्रशासन को एक बैठक के लिए पर्याप्त स्थान की व्यवस्था करने में परेशानी हो रही है, वह पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को किस तरह व्यवस्थित करेगा?
नगर की समस्या छोटी नहीं है। बाजार क्षेत्र में सड़क पर सामान, नालियों पर कब्जा, दुकानों के सामने अतिक्रमण और आवागमन में बाधा लंबे समय से चर्चा का विषय हैं। ऐसे में बैठक भी ऐसी जगह होनी चाहिए थी जहां सभी संबंधित लोगों के बैठने, अपनी बात रखने और अधिकारियों के बीच समुचित चर्चा की पर्याप्त व्यवस्था हो।
यदि 25-30 लोगों की क्षमता वाले कक्ष में ही अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भीड़ जुटती है तो क्या यह बैठक वास्तविक समाधान पर केंद्रित होगी या महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी?
सवाल बैठक से ज्यादा व्यवस्था पर
नगर पालिका के पत्र में कलेक्टर से लेकर एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, नगर पालिका अध्यक्ष और थाना प्रभारी तक को सूचना दी गई है। ऐसे में यह भी सवाल स्वाभाविक है कि क्या बैठक में केवल अधिकारी मौजूद रहेंगे या सड़क और बाजार की समस्या से सीधे प्रभावित दुकानदारों एवं नागरिकों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा?
यातायात सुधार के लिए बुलाई गई बैठक में यदि प्रभावित पक्षों की आवाज ही नहीं सुनी जाएगी तो फिर सड़क पर उतरकर समस्या का समाधान कैसे होगा?

विडंबना यह है कि बैठक का एजेंडा शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करना है, लेकिन बैठक स्थल की व्यवस्था ही अव्यवस्थित नजर आ रही है।
अब देखना यह है कि 25-30 लोगों की क्षमता वाले कक्ष में शहर की यातायात समस्या का समाधान निकलता है या बैठक खुद एक नई अव्यवस्था का उदाहरण बन जाती है।






