Damrua

क्या जनसुनवाई सिर्फ उद्योग के लिये, या आम जन की जीवन की कोई कीमत भी है?

नैला बलौदा मार्ग पर बढ़ते हादसों के बीच एक और कोल वॉशरी का प्रस्ताव, आमजनता के बीच उठाते सवाल? 

डमरूआ न्यूज़ /बलौदा। हिंद मल्टी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की कोल वॉशरी विस्तार परियोजना पर प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले अब क्षेत्र की यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चाम्पा-बलौदा मार्ग पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है और अनेक लोग घायल हुए हैं। ऐसे में क्षेत्र में एक और बड़े औद्योगिक विस्तार से भारी वाहनों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब वर्तमान सड़क व्यवस्था ही बढ़ते यातायात दबाव को संभालने में संघर्ष कर रही है, तब अतिरिक्त कोयला परिवहन, राख परिवहन और औद्योगिक वाहनों का दबाव किस आधार पर स्वीकार किया जा रहा है?

क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विकास की पहली शर्त सुरक्षित आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) होनी चाहिए। यदि सड़कें संकरी हैं, दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं और यातायात प्रबंधन अपर्याप्त है, तो जनसुनवाई से पहले सड़क चौड़ीकरण, बाईपास, सर्विस रोड, ट्रक पार्किंग और सुरक्षा उपायों पर ठोस कार्ययोजना सामने आनी चाहिए।

नागरिकों के अनुसार चाम्पा-बलौदा मार्ग पहले से ही भारी वाहनों के दबाव में है। कोयला, फ्लाई ऐश और अन्य औद्योगिक परिवहन के कारण सड़क पर लगातार ट्रकों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में यदि नई परियोजना अथवा विस्तार को मंजूरी मिलती है तो प्रतिदिन सैकड़ों अतिरिक्त वाहन सड़क पर उतर सकते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ेगा।

जनसुनवाई से पहले अब कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आ रहे हैं—

परियोजना के कारण प्रतिदिन कितने अतिरिक्त ट्रक और भारी वाहन सड़क पर आएंगे?

– क्या परियोजना की ईआईए रिपोर्ट में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना जोखिम का स्वतंत्र अध्ययन किया गया है?

– क्या चाम्पा-बलौदा मार्ग की वर्तमान क्षमता इस अतिरिक्त यातायात को वहन करने योग्य है?

– क्या सड़क चौड़ीकरण, बाईपास या वैकल्पिक मार्ग की कोई योजना है?

– यदि भविष्य में दुर्घटनाएं बढ़ती हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना का मूल्यांकन केवल रोजगार और निवेश के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके सामाजिक और मानवीय प्रभावों को भी समान महत्व मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि सड़कें सुरक्षित नहीं हैं, तो केवल उद्योग स्थापित कर देना विकास नहीं कहलाएगा।

अब जनसुनवाई से पहले यह बहस तेज हो गई है कि क्या पहले क्षेत्र का आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाना चाहिए या फिर जनता की सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों को अनुत्तरित छोड़कर औद्योगिक विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी। आखिर विकास का उद्देश्य लोगों का जीवन बेहतर बनाना है, न कि उन्हें अतिरिक्त जोखिमों के बीच जीने के लिए मजबूर करना।

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