प्रशांत डेनियल 7828438374
भ्रष्टाचार का गढ़ बना मरवाही वनमंडल! 18 लाख के घोटाले की साज़िश बेनकाब – फर्जी वाउचरों से डुप्लीकेट सील तक, SDO ने खोली पूरी पोल!
मरवाही, छत्तीसगढ़ – मरवाही वनमंडल अब भ्रष्टाचार की दलदल में धंसा नजर आ रहा है। ताजा खुलासे ने पूरे विभाग को हिला कर रख दिया है। इस बार कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि खुद उपवनमंडलाधिकारी (SDO) मोहर सिंह मरकाम ने 18 लाख रुपये से अधिक के फर्जी भुगतान की साजिश का पर्दाफाश कर दिया है – और इस साजिश की सबसे काली परत है मरवाही रेंजर की भूमिका, जो इस घोटाले का मुख्य सूत्रधार साबित हो रहा है।
बाईट ग्रिसमी चाँद डी. एफ. ओ.
घोटाले की पटकथा: नकली काम, फर्जी बिल और डुप्लीकेट सील!
शिकायत के अनुसार, मरवाही रेंज के अंतर्गत जलसंवर्धन संरचनाओं के नाम पर ₹18,27,214 के झूठे कार्यों के बिल बनाए गए। फर्जी फोटो लगाए गए। और तो और, पेण्ड्रा SDO की डुप्लीकेट सील और जाली हस्ताक्षर तक बना दिए गए ताकि सरकारी खजाने से मोटी रकम निकाली जा सके। ये सारा खेल मरवाही रेंजर, अटैच SDO और दो बाबुओं की मिलीभगत से रचा गया।
DFO की सूझबूझ से बचा विभाग करोड़ों के नुकसान से!
अगर तत्कालीन DFO सतर्क न होते और वाउचरों को सत्यापन के लिए पेण्ड्रा SDO के पास न भेजते, तो ये 18 लाख की मोटी रकम कब की डकार ली जाती। मोहर सिंह ने वाउचर देखते ही कहा – न ये हस्ताक्षर मेरे हैं, न ही सील असली। यहीं से शुरू हुई साज़िश की परतें खोलने की प्रक्रिया।
रेंजर बना घोटालेबाज – पहले भी करता रहा है फर्जीवाड़ा!
यह सिर्फ एक मामला नहीं है, यह एक पैटर्न है। जिन कामों को जमीन पर किया ही नहीं गया, उनके बिल और फोटो तैयार किए गए – और रेंजर ने खुद वाउचर पास करने की सिफारिश की! इससे ये साफ होता है कि मरवाही रेंजर पहले भी विभागीय धन का गबन करने के लिए इसी तरह के हथकंडे अपनाता रहा है।
अब नहीं रुकेगा – रेंजर को तुरंत सस्पेंड कर जेल भेजो!
अब सवाल कार्रवाई का है। ऐसे भ्रष्ट रेंजर को सिर्फ निलंबित करना काफी नहीं – पूरे कार्यकाल की CBI या EOW से जांच होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि उसने पहले कितने और घोटाले किए हैं। अटैच SDO और दोनों बाबुओं की भूमिका भी संदिग्ध है – इन्हें भी तत्काल हटाया जाए।
सरकार के लिए अग्निपरीक्षा – क्या वाकई जीरो टॉलरेंस है भ्रष्टाचार पर?
अगर इस खुलासे के बाद भी विभाग और सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाते, तो यह भ्रष्ट अफसरों के लिए खुला न्योता होगा कि सरकारी धन लूटो और बच निकलो। मरवाही का यह मामला पूरे छत्तीसगढ़ के वन विभाग के लिए शर्म की बात है – और एक मौका भी कि सिस्टम से गंदगी को साफ किया जाए।