सारंगढ़। खनिज विभाग ने गुडेली-टिमरलगा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से चूनापत्थर परिवहन कर रहे दो हाईवा वाहनों को जब्त कर बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद इलाके में एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बन गया है—जब पत्थर पकड़ा गया तो वह आया कहां से?

कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के निर्देश और खनि अधिकारी के मार्गदर्शन में खनिज अमले ने निरीक्षण के दौरान हाईवा क्रमांक CG-13-AQ-6075 और CG-13-AQ-4044 को अवैध चूनापत्थर परिवहन करते हुए पकड़ा। दोनों वाहनों को कार्रवाई के बाद थाना सारंगढ़ के सुपुर्द कर दिया गया है। विभाग ने यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 एवं खान एवं खनिज विकास अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत की है।
हालांकि कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जब्त किया गया चूनापत्थर किस खदान या किस क्रेशर के लिए ले जाया जा रहा था। यही कारण है कि क्षेत्र में इस कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल वाहनों पर कार्रवाई करने से अवैध खनन की जड़ तक पहुंचना संभव नहीं है। यदि वास्तव में अवैध चूनापत्थर का परिवहन हो रहा था तो इसकी जांच भी होनी चाहिए कि पत्थर का स्रोत क्या था, किस स्थान से उत्खनन किया गया और इसका अंतिम गंतव्य कौन था।
खनन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि अवैध परिवहन का मामला सामने आने पर खदान, स्टॉक यार्ड और संबंधित क्रेशर इकाइयों की भी जांच आवश्यक होती है। क्योंकि बिना स्रोत और गंतव्य की पहचान किए केवल परिवहन पर कार्रवाई से पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं हो पाता।
इधर क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि यदि अवैध खनन स्थलों और भंडारण स्थलों की जांच में देरी हुई तो आगामी बरसात के मौसम में कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं। ऐसे में लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि खनिज विभाग आगे केवल परिवहन तक सीमित रहता है या फिर अवैध खनन और भंडारण के पूरे मामले की तह तक पहुंचकर जिम्मेदार पक्षों पर भी कार्रवाई करता है।
फिलहाल दो हाईवा जब्त होने के बाद कार्रवाई तो हुई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी है—आखिर यह चूनापत्थर आया कहां से और जा कहां रहा था? यही वह प्रश्न है जिसका जवाब सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।



























