जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों का हमला—”सरकार तो साथ थी, अब विपक्ष भी क्यों मौन है?”
खरसिया में प्रस्तावित विस्तार, प्रभावित गांवों का आरोप—15 साल से प्रदूषण झेल रहे हैं, लेकिन सत्ता और विपक्ष दोनों जवाब देने से बच रहे हैं
डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। अदानी पावर लिमिटेड की प्रस्तावित 1600 मेगावाट विस्तार परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले अब विरोध केवल उद्योग तक सीमित नहीं रह गया है। प्रभावित ग्रामीणों ने अब सीधे राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उद्योग के विस्तार को लेकर सरकार का समर्थन पहले से दिखाई देता रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले का विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, इस पूरे मुद्दे पर लगभग मौन क्यों है?

ग्रामीणों का कहना है कि खरसिया विधानसभा क्षेत्र में स्थित इस परियोजना के कारण वर्षों से आसपास के गांवों के लोग प्रदूषण, फ्लाई ऐश, कोयला धूल, जल स्रोतों पर असर और कृषि संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद जिस राजनीतिक नेतृत्व से उद्योग के खिलाफ मुखर आवाज उठाने की उम्मीद थी, वह अब तक सामने नहीं आया। इसी कारण स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर विपक्ष इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका क्यों नहीं निभा रहा।
विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि पिछले लगभग 15 वर्षों से संचालित इस उद्योग के कारण हवा, पानी और मिट्टी पर लगातार दबाव बढ़ा है। उनका आरोप है कि फ्लाई ऐश प्रबंधन, स्थानीय रोजगार, किसानों की समस्याओं और सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) को लेकर लगातार शिकायतें उठती रही हैं। अब जबकि कंपनी संयंत्र की क्षमता बढ़ाकर लगभग 3800 मेगावाट करने की तैयारी में है, प्रभावित गांवों के लोग पूछ रहे हैं कि पहले पुराने मुद्दों का समाधान क्यों नहीं किया गया।
जनसुनवाई से पहले जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी जीवन पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर विस्तार का विरोध किया है। ज्ञापन में स्थानीय रोजगार, पर्यावरणीय प्रभाव, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और अधूरे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की गई है।
इस पूरे विवाद के बीच वर्ष 2012 की कूलिंग टॉवर दुर्घटना भी एक बार फिर चर्चा में है। वर्तमान परियोजना का परिसर पहले कोरबा वेस्ट पावर कंपनी लिमिटेड (KWPCL) के नाम से विकसित किया जा रहा था। 21 जुलाई 2012 को निर्माणाधीन कूलिंग टॉवर के भीतर सहायक प्लेटफॉर्म गिरने से पांच श्रमिकों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। बाद में इस परियोजना का अधिग्रहण अदानी समूह ने किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना आज भी उनकी स्मृतियों में जीवित है और औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल छोड़ गई थी।
दूसरी ओर कंपनी की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रस्तावित विस्तार में आधुनिक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक, उन्नत प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली, हरित पट्टी, शून्य तरल अपशिष्ट (ZLD) और फ्लाई ऐश के पूर्ण उपयोग जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नई तकनीक से प्रति यूनिट उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि मौजूदा संयंत्र में भी ऐसे ही दावे किए गए थे, तो जमीनी स्तर पर शिकायतें समाप्त क्यों नहीं हुईं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा विपक्ष की चुप्पी को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की भूमिका जनता की आवाज को शासन तक पहुंचाने की होती है। इसलिए वे चाहते हैं कि सभी राजनीतिक दल, चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सार्वजनिक करें।
सरकार के बाद अब विपक्ष से भी जवाब चाहिए
प्रभावित गांवों में यह भावना तेजी से उभर रही है कि यदि उद्योग विस्तार से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक सवाल इतने गंभीर हैं, तो विपक्षी दलों को भी स्पष्ट रूप से अपना पक्ष रखना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही की भी परीक्षा है।
15 साल पुराने सवाल आज भी अनुत्तरित?
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय रोजगार, फ्लाई ऐश प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण, किसानों के नुकसान, स्वास्थ्य प्रभाव और सीएसआर जैसे मुद्दों पर वर्षों से शिकायतें उठती रही हैं। उनका आग्रह है कि विस्तार की अनुमति से पहले इन सभी बिंदुओं की स्वतंत्र समीक्षा और सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जानी चाहिए.
2012 की त्रासदी आज भी चर्चा में
कोरबा वेस्ट पावर कंपनी लिमिटेड के निर्माणकाल के दौरान हुई कूलिंग टॉवर दुर्घटना, जिसमें पांच श्रमिकों की जान गई थी, आज भी स्थानीय लोगों की स्मृति का हिस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी नए विस्तार पर विचार करते समय पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ-साथ श्रमिक सुरक्षा और परियोजना की जवाबदेही भी उतनी ही गंभीरता से परखी जानी चाहिए।



























