Damrua

अडानी @ जहरीली हवा के बीच एक और विस्तार!

कागजों में 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग, जमीन पर राख से पटते खेत… अब रायगढ़ की जनता मांगेगी जवाब

6. Draft EIA EMP Report Raigarh Phase III 1

डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। औद्योगिक विस्तार की नई पटकथा एक बार फिर रायगढ़ की धरती पर लिखी जा रही है। अदानी पावर लिमिटेड ने अपने मौजूदा 2200 मेगावाट ताप विद्युत संयंत्र के साथ 1600 मेगावाट की दो नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल इकाइयों के विस्तार का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। परियोजना के अनुसार विस्तार के बाद संयंत्र की कुल क्षमता 3800 मेगावाट हो जाएगी। इसके लिए 185 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि, प्रतिवर्ष 6.67 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला और 32 एमसीएम अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होगी, जबकि करीब 2.66 मिलियन टन अतिरिक्त फ्लाई ऐश भी उत्पन्न होगी।

परियोजना के दस्तावेजों में दावा किया गया है कि फ्लाई ऐश का 100 प्रतिशत उपयोग किया जाएगा और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उसका सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। लेकिन रायगढ़ की जमीनी तस्वीर इन दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। जिले के अनेक इलाकों में सड़क किनारे, जंगलों, नालों और खेतों के आसपास फ्लाई ऐश के ढेर आज भी आसानी से देखे जा सकते हैं। बरसात के दौरान यही राख बहकर खेतों और प्राकृतिक जल स्रोतों तक पहुंचती है। किसानों का कहना है कि मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि हवा में उड़ती राख से सांस संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि नया संयंत्र कितना बड़ा होगा, बल्कि यह है कि वर्तमान प्रदूषण पर नियंत्रण की वास्तविक स्थिति क्या है। यदि पहले से संचालित उद्योग पर्यावरणीय शर्तों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं, तो खुले में फ्लाई ऐश के ढेर आखिर किसकी लापरवाही का परिणाम हैं? यदि 100 प्रतिशत उपयोग का दावा सही है, तो खेतों और जंगलों में पहुंच रही राख का स्रोत कौन है? यदि निगरानी प्रभावी है, तो उल्लंघन करने वालों पर अब तक कितनी कार्रवाई हुई?

परियोजना के अनुसार कुल कोयला आवश्यकता बढ़कर 16.52 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो जाएगी तथा कुल जल आवश्यकता 82 एमसीएम तक पहुंच जाएगी। इसका सीधा प्रभाव परिवहन, वायु गुणवत्ता और जल संसाधनों पर पड़ना स्वाभाविक है। रायगढ़ पहले से ही कोयला खदानों, ताप विद्युत संयंत्रों और भारी उद्योगों के दबाव में है। ऐसे में किसी भी नए विस्तार से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि मौजूदा पर्यावरणीय दायित्वों का पालन केवल दस्तावेजों में नहीं, बल्कि धरातल पर भी दिखाई दे।

उद्योग, प्रशासन और सरकार से रायगढ़ क्षेत्र वासियों के सवाल

जनसुनवाई केवल कानूनी औपचारिकता नहीं हो सकती। यह वह मंच है जहां जिले के लोग उद्योग, प्रशासन और पर्यावरणीय नियामकों से सीधे जवाब मांगेंगे। क्या कारण है कि 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग के दावों के बावजूद सड़क किनारे, खेतों और जंगलों में राख के ढेर आज भी दिखाई देते हैं? यदि पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन हो रहा है, तो प्रदूषण संबंधी शिकायतें लगातार क्यों मिल रही हैं और उन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? जब वर्तमान फ्लाई ऐश प्रबंधन ही विवादों में है, तब प्रतिवर्ष 2.66 मिलियन टन अतिरिक्त राख का सुरक्षित निपटान किस व्यवस्था से होगा और उसकी स्वतंत्र निगरानी कौन करेगा? महानदी से 32 एमसीएम अतिरिक्त पानी लेने के बाद स्थानीय जल संसाधनों, किसानों और भविष्य की जल उपलब्धता पर क्या प्रभाव पड़ेगा? क्या नए विस्तार की अनुमति देने से पहले वर्तमान संयंत्र की पर्यावरणीय शर्तों के पालन का स्वतंत्र सामाजिक एवं पर्यावरणीय ऑडिट सार्वजनिक किया जाएगा?

यह केवल जनसुनवाई नहीं बल्कि पर्यावरणीय जवाब देही की परीक्षा भी है

रायगढ़ के लिए यह जनसुनवाई केवल एक नई परियोजना पर राय देने का अवसर नहीं, बल्कि वर्षों से बढ़ते प्रदूषण, जहरीली हवा, फ्लाई ऐश के अनियंत्रित फैलाव और पर्यावरणीय जवाबदेही की वास्तविक परीक्षा भी है। विकास आवश्यक है, लेकिन यदि उसकी कीमत किसानों की जमीन, लोगों की सेहत, जंगलों और जल स्रोतों को चुकानी पड़े, तो जनता का हर सवाल पूरी गंभीरता से सुना और उसका तथ्यात्मक उत्तर दिया जाना भी उतना ही आवश्यक है।

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