सरिया तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत सांकरा में इन दिनों अवैध रेत खनन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आरोप है कि सांकरा निवासी अनिल मिश्रा द्वारा नदी गांव, सांकरा और पोरत के नदी तटों से बिना किसी वैध अनुमति के जेसीबी मशीनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रेत निकालकर बेचने का काम किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह मामला अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कथित तौर पर रोजाना करीब 200 ट्रैक्टर तक रेत नदी तटों से निकाली जा रही है। बताया जा रहा है कि इस रेत को नदीगांव और सांकरा क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर डम्प किया जाता है, जहां से बाद में खरीददारों को सप्लाई किया जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में लगातार रेत निकासी होने की चर्चाओं ने अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि रात और सुबह के समय नदी किनारों पर ट्रैक्टरों और मशीनों की आवाजाही लगातार देखी जा रही है। बाजार में एक ट्रैक्टर रेत की कीमत करीब 1100 से 1200 रुपये तक बताई जा रही है। वहीं सबसे ज्यादा सवाल उस कथित “रॉयल्टी वसूली” को लेकर उठ रहे हैं, जिसमें खरीददारों से 300 रुपये तक अतिरिक्त राशि ली जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जब खनन को लेकर वैध अनुमति होने की जानकारी सामने नहीं आई है, तो आखिर यह “रॉयल्टी” किस आधार पर वसूली जा रही है? क्या यह केवल लोगों को भ्रमित करने का तरीका है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब भी कोई व्यक्ति इस कथित रेत खनन स्थल पर पहुंचकर सवाल उठाने की कोशिश करता है, तब एक बड़े भाजपा नेता का नाम लेकर दबाव बनाने या बचने का प्रयास किया जाता है। हालांकि यह कहना पूरी तरह उचित नहीं होगा कि संबंधित भाजपा नेता का इस मामले से सीधा संबंध है, क्योंकि अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। संभव है कि केवल राजनीतिक नाम का इस्तेमाल कर प्रभाव जमाने की कोशिश की जा रही हो।
सूत्रों के आधार पर सामने आई इस जानकारी ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बिना अनुमति नदी तटों से बड़े पैमाने पर रेत निकासी हो रही है, तो इससे शासन को भारी राजस्व हानि होने के साथ-साथ पर्यावरणीय नुकसान भी हो सकता है। लगातार जेसीबी मशीनों के उपयोग से नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ने और जलस्तर प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि खनिज विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है। क्या वास्तव में अवैध रेत खनन का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है या फिर यह केवल चर्चाओं तक सीमित मामला है, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।
फिलहाल इस पूरे मामले की जड़ें कहां तक फैली हैं, कौन लोग इसमें शामिल हैं और “रॉयल्टी” के नाम पर हो रही वसूली किसके लिए की जा रही है, इसकी पड़ताल जारी है। इस मामले का दूसरा भाग जल्द सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।



























