प्रशांत डेनियल 7828438374
जिला शिक्षा अधिकारी व टीम ने मिशन स्कूल गौरेला का किया निरीक्षण
जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही नवीन जिला बनाया गया है, जिला प्रसाशन, इंटक, व पुरातत्व विभाग द्वारा प्राचीन धरोहर के हस्तलिखित दस्तावेजों व पांडुलिपियों को संधारित किया जा रहा है, पुराने संस्कृति व इतिहास को संजोकर रखने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर व शिक्षा अधिकारी व इंटक ने उठाई है।
इस प्रयास में आज इस क्षेत्र के सबसे प्राचीन स्कूल मिशन स्कूल का निरीक्षण जिला शिक्षा अधिकारी, डॉक्टर गौतम व उनकी टीम द्वारा किया गया स्कूल की प्रभारी प्राचार्य भावना आर्थर ने बताया कि यह स्कूल 1927 में प्रारंभ हुआ था, शिक्षा के क्षेत्र में समाज को कुछ योगदान देने की योजना के साथ में मिशनरीयों ने आजादी से पूर्व इस स्कूल की स्थापना की इसके पहले इन्चार्ज अमेरिकन मिशनरी क्लोपास थे और पहले हेड मास्टर प्यारेलाल आर्थर हुए, जिन्होंने 1935 से 1967 तक अपनी सेवाएं प्रदान की, पहले प्रधान पाठक व समिति के सचिव होकर उन्होंने स्कूल का संचालन किया। उस वक्त इस स्कूल का नाम मिशन एंग्लो वर्णाकुलम मिडिल स्कूल के नाम से संचालित किया जाता था। उसके बाद से लगातार इस प्राचीन स्कूल ने शिक्षण कार्य में विशेष भूमिका अदा की है। 1927 के हस्तलिखित रजिस्टर और उसके पुराने रिकॉर्ड्स भी मौजूद हैं। 15 अक्टूबर 1929 का मान्यता का रिकार्ड जिसे कार्यालय डायरेक्टर ऑफ पब्लिक इंस्ट्रुक्शन सेंट्रल प्रोविंसेस रायपुर द्वारा प्रेषित किया गया था, अवलोकन किया गया। साथ ही शाला व संपत्ति की कार्यवाही पंजी जो तत्कालीन सेक्रेटरी स्वर्गीय प्यारेलाल आर्थर के हस्तलिखित है, जिसका सूक्ष्म अवलोकन जिला शिक्षा अधिकारी एवं टीम ने किया।
नवपदस्थ कलेक्टर ने प्राचीन दस्तावेजो को देखकर खुशी व्यक्त की
जिला कलेक्टर डॉ.संतोष कुमार देवांगन ने आश्चर्य व्यक्त करते हुवे कहा कि इतने प्राचीन हस्तलिखित रिकॉर्ड्स को अवलोकन कर पढ़ना मेरे लिए बहुत सौभाग्य का विषय है। साथ ही इन धरोहरों को संरक्षित करके रखने के लिए उन्होंने प्राचार्य भावना आर्थर की प्रशंसा की, वर्तमान में शाला में संसाधनो व शिक्षकों की कमी होने के बावजूद बेहतर शिक्षा प्रदान करने की कोशिश जारी है। शाला प्रबंधन की ओर से नवीन पदस्थ कलेक्टर का अभिनंदन किया गया।