रोजगार सहायक कमलमोहन लहरे पर गड़बड़ी के आरोप, जांच के बाद भी कार्रवाई लंबित—संरक्षण पर उठे सवाल
14वें-15वें वित्त की राशि में अनियमितता का मामला, पूर्व जांच और हालिया रिपोर्ट में विरोधाभास
मरवाही
जनपद पंचायत मरवाही अंतर्गत ग्राम लोहारी के तत्कालीन रोजगार सहायक कमलमोहन लहरे पर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत और जांच रिपोर्ट के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और संभावित संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 22 नवंबर 2022 को 14वें एवं 15वें वित्त आयोग की राशि में गड़बड़ी को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इस शिकायत पर जनपद पंचायत मरवाही के तत्कालीन कार्यक्रम अधिकारी (पीओ) समीर ध्रुव के नेतृत्व में जांच की गई। जांच के दौरान यह पाया गया कि रोजगार सहायक कमलमोहन लहरे के निजी खाते में 18,500 रुपये तथा उनके सगे भाई रोशन लहरे के खाते में 11,546 रुपये और 12,500 रुपये, कुल मिलाकर 45,546 रुपये की राशि जमा हुई है। जांच अधिकारी ने इसे “अनियमित एवं अनुचित” मानते हुए आगे की कार्रवाई हेतु मामला जिला पंचायत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को प्रेषित किया।
पहले की जांच में भी सामने आई थी गड़बड़ी
इससे पूर्व 27 जुलाई 2021 को सरपंच-सचिव के खिलाफ हुई जांच में भी वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले थे। जांच में सामने आया कि मरवाही विधानसभा उपचुनाव के दौरान बूथ क्रमांक 16 और 18 (चलचली लोहारी) में साफ-सफाई, मरम्मत, पुताई, पंखा-लाइट फिटिंग जैसे कार्यों के नाम पर 31,500 रुपये का भुगतान दुर्गेश प्रजापति को किया गया।
इसके अलावा,
आदर्श ग्राम मतदान केंद्र (बूथ क्रमांक 16) की पुताई के नाम पर 18,500 रुपये,
सोनू पेंटर को 8,500 रुपये,
तथा अन्य व्यक्ति को मतदान केंद्र व्यवस्था के नाम पर 22,676 रुपये का भुगतान किया गया।
इस मामले में सचिव द्वारा लिखित बयान में स्वीकार किया गया था कि बिना प्रस्ताव और बैठक के ही भुगतान किए गए।
जांच रिपोर्ट में विरोधाभास, उठे नए सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूर्व जांच में संबंधित कार्यों के लिए भुगतान पहले ही दर्शाया जा चुका था, तो बाद की जांच (22 नवंबर 2022) में उसी कार्य के लिए राशि रोजगार सहायक और उसके भाई के खातों में कैसे पहुंची?
इसके अलावा, पहले की जांच में जिन लोगों को भुगतान दिखाया गया, उनमें रोजगार सहायक या उसके भाई का नाम क्यों नहीं आया? वहीं, बाद की जांच में सरपंच और सचिव द्वारा बैठक होने का बयान दिया जाना भी संदेह को बढ़ाता है।
कार्रवाई में देरी पर उठ रहे सवाल
जांच अधिकारी द्वारा स्पष्ट रूप से राशि लेना अनुचित बताए जाने के बावजूद अब तक संबंधित रोजगार सहायक के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या मामले में किसी प्रकार का प्रशासनिक या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि संबंधित रोजगार सहायक की पत्नी पूजा लहरे कांग्रेस की पार्षद हैं, जिससे संभावित राजनीतिक प्रभाव की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।