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पेण्ड्रा के आजाद चौंक में मिली माचिस की डिब्बी के बराबर प्राचीन पॉकेट कुरान की पांडुलिपि

प्रशांत डेनियल 7828438374

 

पेण्ड्रा के आजाद चौंक में मिली माचिस की डिब्बी के बराबर प्राचीन पॉकेट कुरान की पांडुलिपि

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ज्ञानभारतम एप से किया गया डिजिटल संरक्षण

 

गौरेला पेंड्रा मरवाही, 27 अप्रैल 2026/कलेक्टर  लीना कमलेश मंडावी के मार्गदर्शन में “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जिले में संचालित व्यापक सर्वेक्षण के दौरान आज पेण्ड्रा के आजाद चौंक निवासी  शरद अग्रवाल के घर में माचिस की डिब्बी के बराबर प्राचीन पॉकेट कुरान की पांडुलिपि मिली, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रुप में सामने आई है। सर्वेक्षण कर्ता  निकेश साहू एवं उनकी टीम द्वारा इसका डिजिटल संरक्षण “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से किया गया। जिले में प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वेक्षण कार्य के जिला नोडल डॉ राहुल गौतम ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत जिले में कुल 10 प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उनका डिजिटलीकरण पूर्ण किया गया।

पॉकेट कुरान के स्वामित्व का अधिकार रखने वाले  शरद अग्रवाल ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस तरह की छोटी कुरान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसके कवर पर अरबी में कुरान मजीद लिखा है। यह पूरी कुरान का एक बहुत ही छोटा संस्करण है। ऐसी नन्ही कुरान 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में काफी लोकप्रिय हुई थीं। उस समय की नई तकनीक (जैसे लिथोग्राफी) के आने से इतने छोटे अक्षरों को लिखना संभव हो गया था। सफर के लिए लोग इसे आसानी से अपनी जेब या छोटे बैग में रखकर सफर के दौरान हिफाजत के लिए साथ रखते थे। कई लोग इसे सौभाग्य या बरकत के लिए अपने पास रखते हैं या इसे ताबीज के रूप में इस्तेमाल करते हैं। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, मुस्लिम सैनिकों को अक्सर ऐसी छोटी कुरान दी जाती थी ताकि वे उन्हें अपने साथ रख सकें। इसकी अक्षर इतनी बारीक होती है कि इसे पढ़ने के लिए अक्सर आवर्धक लेंस की जरूरत पड़ती है। चूंकि यह कुरान का ही स्वरूप है, इसलिए इसकी पवित्रता का ध्यान रखना जरूरी है।

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