कटंगपाली क्षेत्र का महुआपाली अब अवैध डोलोमाइट खनन का गढ़ बनता जा रहा है। यहां खनन का खेल छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि भारी मशीनों के सहारे बड़े पैमाने पर चल रहा है। पोकलेन और जेसीबी जैसी मशीनों से पत्थर निकाले जा रहे हैं, जबकि ढुलाई के लिए ट्रैक्टरों का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है।
मशीनों से खनन, ट्रैक्टरों से सप्लाई
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, महुआपाली में दिन-रात पोकलेन और जेसीबी मशीनें जमीन को चीरकर डोलोमाइट पत्थर निकाल रही हैं। इसके बाद इन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए कटंगपाली क्षेत्र में संचालित क्रेशर प्लांटों तक पहुंचाया जा रहा है। यह पूरा नेटवर्क इस तरह से काम कर रहा है मानो इसे किसी का डर ही न हो।
क्रेशरों में खप रहा अवैध पत्थर
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह अवैध रूप से निकाला गया पत्थर कहां जा रहा है? जानकारी के अनुसार, कटंगपाली में संचालित कई क्रेशरों में इस पत्थर को खपाया जा रहा है। यानी खदान से लेकर क्रेशर तक एक पूरा चेन सक्रिय है, जो अवैध खनन को बढ़ावा दे रहा है।
राजस्व का बड़ा नुकसान, कार्रवाई नदारद
इस अवैध खनन से शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। बिना रॉयल्टी और अनुमति के निकाले जा रहे पत्थर सीधे बाजार में पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद खनिज विभाग, सरिया तहसीलदार और सारंगढ़ एसडीएम की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
माफियाओं का नेटवर्क मजबूत, प्रशासन कमजोर?
क्षेत्र में चर्चा है कि खनिज माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि प्रशासनिक कार्रवाई ठप पड़ गई है। शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन न तो मशीनें जब्त हो रही हैं और न ही जिम्मेदारों पर कोई सख्त कदम उठाया जा रहा है।
सीएम तक जाएगी बात, माफियाओं में बढ़ेगी बेचैनी
अब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री तक ले जाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे नेटवर्क का खुलासा राज्य स्तर पर किया जाएगा। इससे माफियाओं में खलबली मचने की संभावना है।
अब बचना मुश्किल!
महुआपाली में अवैध खनन करने वालों के लिए यह आखिरी चेतावनी मानी जा रही है। अगर जांच शुरू हुई, तो पोकलेन से लेकर ट्रैक्टर और क्रेशर तक, हर कड़ी पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में जो आज खुलेआम खेल खेल रहे हैं, उनके लिए आने वाला समय भारी पड़ सकता है।