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जेल के भीतर से मदद की गुहार या भ्रष्टाचार का खुला खेल? विचाराधीन बंदियों के नाम पर पैसे मांगने के आरोप, जिला जेल की व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

रायगढ़। जिला जेल रायगढ़ एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। जेल के भीतर से कथित तौर पर भेजे जा रहे मोबाइल संदेशों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक वायरल संदेश में कथित रूप से लिखा गया है कि हमसे टॉयलेट साफ करवाते हैं, दिए गए नंबर पर पैसे भेज दीजिए। इस संदेश के सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जेल के भीतर ऐसा क्या चल रहा है कि विचाराधीन बंदियों को इस तरह मदद की गुहार लगाने की नौबत आ रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जेल के भीतर से मोबाइल फोन और संदेश संचालित हो रहे हैं तो यह जेल प्रशासन की जानकारी के बिना कैसे संभव है। जेल जैसी उच्च सुरक्षा वाली व्यवस्था में मोबाइल फोन की उपलब्धता अपने आप में गंभीर चिंता का विषय है। यदि बंदी वास्तव में जेल के भीतर से लोगों को फोन और संदेश भेज रहे हैं तो सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

कथित संदेशों में यह भी आरोप लगाया गया है कि बंदियों से टॉयलेट साफ करवाया जाता है और उनसे पैसे की मांग की जाती है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल जेल प्रबंधन का मामला नहीं बल्कि मानवाधिकारों और बंदियों के सम्मानजनक व्यवहार से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है। हैरानी की बात यह है कि ऐसे आरोप सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने के बावजूद अब तक किसी उच्चस्तरीय जांच की घोषणा नहीं हुई है।

जिले में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आखिर यह पूरा खेल किसके संरक्षण में चल रहा है। यदि जेल के भीतर मोबाइल फोन सक्रिय हैं, बंदी बाहरी लोगों से संपर्क कर रहे हैं और आर्थिक लेन-देन की मांग की जा रही है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी। लोगों का कहना है कि केवल औपचारिक जांच के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

जेल प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देना है। जब तक इन सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं मिलता, तब तक यह मामला रायगढ़ जिला जेल की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़ा करता रहेगा। यदि आरोप निराधार हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से खारिज किया जाना चाहिए और यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल पूरा मामला अनेक सवालों के बीच घिरा हुआ है और लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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