राष्ट्र की अखंडता से खिलवाड़ के आरोपों पर बीएनएस की कठोर धारा 152 समेत कई संगीन प्रावधान लगाए गए, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू
डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। कथित लव जिहाद, धार्मिक पहचान छिपाकर संबंध स्थापित करने, महिला उत्पीड़न, आपराधिक धमकी तथा भारत विरोधी नारे लगाने के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में रायगढ़ पुलिस ने आखिरकार कड़ी कार्रवाई करते हुए अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह के निर्देश के बाद महिला थाना रायगढ़ में अपराध क्रमांक 52/2026 दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं को शामिल किया है जो न केवल महिला उत्पीड़न और धमकी से संबंधित हैं बल्कि देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता से जुड़े आरोपों को भी अपने दायरे में लेती हैं।

पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 351(3), 152 और 197 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों को शामिल किया गया है। इनमें धारा 152 सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर मानी जा रही है, जिसके अंतर्गत भारत की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों की जांच की जाती है। इस धारा में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है, जिससे स्पष्ट है कि पुलिस ने आरोपों को सामान्य वैवाहिक अथवा व्यक्तिगत विवाद के रूप में नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय प्रभाव वाले प्रकरण के रूप में लिया है। इसके अतिरिक्त पुलिस ने लव जिहाद के मामले में भी छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 4 के तहत कार्यवाही की है.
सूत्रों के अनुसार शिकायत में ऐसे आरोप भी शामिल हैं जिनमें भारत विरोधी नारे लगाए जाने, राष्ट्रविरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रीय एकता को प्रभावित करने वाले कथनों का उल्लेख किया गया है। इन्हीं आरोपों के मद्देनजर धारा 197 को भी एफआईआर में शामिल किया गया है। वहीं धारा 351(3) गंभीर आपराधिक धमकी तथा धारा 85 महिला के प्रति क्रूरता और उत्पीड़न से संबंधित आरोपों को संबोधित करती है। पुलिस अब शिकायतकर्ता, गवाहों तथा उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत विवेचना कर रही है।
इस कार्रवाई को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मामले को लेकर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा कठोर कार्रवाई की मांग की जा रही थी। पुलिस अधीक्षक स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बाद अब मामला औपचारिक रूप से आपराधिक जांच के दायरे में आ चुका है। जांच एजेंसियां कथित ऑडियो, वीडियो, मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण कर रही हैं ताकि आरोपों की सत्यता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का विधिसम्मत निर्धारण किया जा सके।
यदि विवेचना के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोप साक्ष्यों से पुष्ट होते हैं तो यह मामला केवल महिला उत्पीड़न तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय एकता और अखंडता से जुड़े गंभीर अपराधों की श्रेणी में भी स्थापित हो सकता है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि प्रकरण की निष्पक्ष और तथ्याधारित जांच जारी है तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।




























