Damrua

घरघोड़ा पुलिस का नया मॉडल — अपराध पकड़ो, थाने लाओ, फिर सिस्टम में घोलकर गायब कर दो

डमरूआ/ रायगढ़। जिले में पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह लगातार अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात कर रहे हैं। एक के बाद एक बड़ी कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन घरघोड़ा थाना क्षेत्र से जो कहानी निकलकर सामने आई है, उसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कहीं जीरो टॉलरेंस का मतलब जीरो एफआईआर तो नहीं हो गया।

कोयले का ट्रैक्टर पकड़ा गया, लेकिन कानून रास्ते में उतर गया

08DHA 8 DEC KAT 3 2023 1702062061 1702062061घरघोड़ा क्षेत्र में अवैध कोयले का कारोबार फिर से गर्म बताया जा रहा है। खेतों, नदी-नालों और एसईसीएल की ओपन कास्ट माइंस से निकलने वाला कोयला कथित तौर पर ट्रैक्टरों और छोटे वाहनों से उद्योगों और ईंट भट्टों तक पहुंच रहा है। चर्चा यह भी है कि इस पूरे खेल में स्थानीय सिस्टम का संरक्षण मिलने के बिना इतना बड़ा नेटवर्क चल ही नहीं सकता। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले पतेरापाली टेरम के पास अवैध कोयले से लोड एक ट्रैक्टर को पकड़ा गया था। ट्रैक्टर को थाना भी लाया गया, लेकिन हैरत की बात यह रही कि न अपराध दर्ज हुआ, न जब्ती दिखी और न ही कोई आधिकारिक कार्रवाई सामने आई। अब इलाके में लोग मजाक कर रहे हैं कि घरघोड़ा में ट्रैक्टर थाने इसलिए लाए जाते हैं ताकि कानून को आराम मिल सके।

वायरल ऑडियो ने बढ़ाई गर्मी

आरक्षक बोले — हमें तो केवल तीन हजार ही मिले

अब इस पूरे मामले में एक कथित ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रही है। वायरल ऑडियो में आरक्षक पारसमणी बेहरा कथित तौर पर यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि उन्हें बंटवारे में केवल तीन हजार रुपए ही मिले हैं। ऑडियो में यह भी कहा जा रहा है कि कोयला लोड ट्रैक्टर को थाने लाया गया था और पूरे मामले की जानकारी थाना प्रभारी को थी। यहीं से सवालों की असली खान शुरू होती है। यदि ट्रैक्टर थाने आया था तो कार्यवाही क्यों नहीं हुई। यदि कोई अपराध नहीं था तो ट्रैक्टर थाने क्यों लाया गया। और यदि कार्रवाई हुई थी तो रिकॉर्ड कहां है। अब पूरा सवाल सीधे थाना प्रभारी की कुर्सी तक पहुंच गया है।

घरघोड़ा मॉडल ऑफ पुलिसिंग

unnamedपकड़ो भी, छोड़ो भी, और रिकॉर्ड में कुछ हुआ ही नहीं
इलाके में लोग अब चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि घरघोड़ा थाना शायद देश का पहला ऐसा थाना बन गया है जहां ट्रैक्टर थाने आता भी है, बंटवारा भी होता है, ऑडियो भी वायरल होता है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में कुछ हुआ ही नहीं। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि यदि आरक्षक केवल तीन हजार मिलने की बात कर रहा है तो बाकी रकम किस विभागीय आध्यात्मिक शक्ति में विलीन हो गई।

जीरो टॉलरेंस या जीरो एंट्री?

अपराध अंदर आया, कागज में घुसने से पहले बाहर निकल गया

पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जिले में अपराध के खिलाफ सख्ती का दावा किया जा रहा है, दूसरी ओर घरघोड़ा क्षेत्र में अवैध कोयले के मामलों पर कथित समझौते की चर्चाएं आम हैं।
अब लोग तंज कस रहे हैं कि घरघोड़ा थाना शायद नई कार्यप्रणाली पर काम कर रहा है — अपराध को खत्म नहीं करो, रिकॉर्ड से गायब कर दो। क्योंकि जब कागज में अपराध रहेगा ही नहीं, तो अपराध दर अपने आप कम दिखेगी। इलाके में यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि क्या घरघोड़ा थाने का पूरा सिस्टम इसी प्रकार की जीरो टॉलरेंस स्कीम पर चल रहा है, जहां कार्रवाई से ज्यादा मैनेजमेंट महत्वपूर्ण है।

बयान ऐसा कि लोग बोले — सच्चाई का भी अपना कमीशन होता है

बताया जा रहा है कि जब आरक्षक पारसमणी बेहरा से यह पूछा गया कि ट्रैक्टर छोड़ने के एवज में डेढ़ लाख रुपए लेने की चर्चा चल रही है, तब उन्होंने इनकार तो किया, लेकिन बाद में कथित तौर पर यह भी कहा कि उन्हें केवल तीन हजार रुपए मिले थे। अब इलाके में लोग चुटकी ले रहे हैं कि ईमानदारी भी किस्तों में बंटी हुई है। कोई पूछ रहा है कि डेढ़ लाख का हिसाब कौन रख रहा था और तीन हजार की पारदर्शिता किसके हिस्से आई।

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