Damrua

खनिज विभाग Sarangarh-Bilaigarh: मंशा कुछ और, अमल कुछ और—अफसर सीएम को ही गुमराह करने में जुटे?

सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले में खनिज विभाग की कार्यशैली को देखकर अब सवाल सिर्फ माफियाओं पर नहीं, विभागीय अफसरों की निष्क्रियता पर भी उठने लगे हैं।

गुडेली और कटंगपाली क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन पर कार्रवाई न होना अब एक प्रशासनिक चूक नहीं, एक सुनियोजित अनदेखी जैसा प्रतीत होने लगा है।

खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधन विभाग की जिम्मेदारी स्वयं प्रदेश के मुख्या सीएम विष्णु देव साय के पास है।उन्होंने जिस मंशा के साथ इस विभाग की कमान संभाली, जमीनी हकीकत उससे ठीक उलट तस्वीर पेश कर रही है।

 

सीएम की मंशा पर भारी पड़ते अफसर?

 

यह मानना मुश्किल है कि मुख्यमंत्री अवैध खनन जैसे गंभीर मुद्दे से अनजान हों।लेकिन यह कहना भी उतना ही सच प्रतीत होता है कि जमीनी स्तर के अफसर अपनी निष्क्रियता और दिखावटी कार्रवाइयों से न सिर्फ हालात बिगाड़ रहे हैं, बल्कि शीर्ष नेतृत्व को भी गुमराह कर रहे हैं।

 

अंदरखाने चर्चा है कि वास्तविक अवैध खनन की रिपोर्ट ऊपर तक नहीं पहुंचती सिर्फ दिखाने लायक कार्रवाई को ही उपलब्धि बनाकर पेश किया जाता है और बड़े खेल को छोटे मामलों में दबा दिया जाता है

 

गुडेली–कटंगपाली: जहां अवैध खनन खुला राज

 

गुडेली और कटंगपाली इलाके में अवैध खनन कोई छिपा हुआ सच नहीं है।दिन-रात चलते ट्रक, बिना वैध अनुमति निकाला गया पत्थर, और रॉयल्टी को लेकर उठते सवाल—सब कुछ स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की नजरों के सामने है।इसके बावजूद खनिज विभाग की ओर से ठोस और निर्णायक कार्रवाई का अभाव यह संकेत देता है कि या तो विभाग हालात को गंभीरता से नहीं ले रहे या फिर गंभीरता दिखाने की अनुमति ही नहीं है?

 

एक हफ्ते पहले की ‘कार्रवाई’: दिखावा पूरा, फाइल बंद

 

एक सप्ताह पूर्व की घटना इस पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।दिखाने के लिए चार ट्रैक्टर रेत जब्त किए गए ,मीडिया को बाइट दी गई,तस्वीरें खिंचीं,समाचार चला, और वह कार्रवाई शासन के DPR में दर्ज होते ही मामला समाप्त मान लिया गया। स्थानीय लोग इसे कार्रवाई कम, फोटोसेशन ज्यादा बताते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि

=अवैध खनन का मूल नेटवर्क जस का तस बना रहा

=बड़े खिलाड़ी बेखौफ काम करते रहे

= और विभाग अपनी पीठ खुद थपथपाता रहा

 

क्या सीएम तक पूरी सच्चाई पहुंच रही है?

 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री को वास्तविक स्थिति की पूरी और सटीक जानकारी दी जा रही है? या फिर अफसरशाही का एक वर्ग सब ठीक है की रिपोर्ट देकर विभाग और सरकार—दोनों की साख को नुकसान पहुंचा रहा है? यदि मंशा साफ है, तो अमल कमजोर क्यों? और यदि अमल कमजोर है, तो जिम्मेदारी किसकी?

 

अब जरूरत ईमानदार अमल की

 

यह किसी पर व्यक्तिगत आरोप का विषय नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार का सवाल है।

सारंगढ़–बिलाईगढ़ जैसे संवेदनशील जिले में सिर्फ कागजी कार्रवाई से नहीं बल्कि मैदानी, सख्त और निष्पक्ष कदमों से स्थिति सुधर सकती है।

 

अब वक्त है कि

= दिखावटी कार्रवाइयों की जगह वास्तविक कार्रवाई हो

=माफियाओं के बजाय जनता का भरोसा जीता जाए

=और खनिज विभाग वह काम करे, जिसकी अपेक्षा स्वयं मुख्यमंत्री ने इस विभाग से की है

 

अंत में सवाल वही

 

अगर सब कुछ ठीक है तो अवैध खनन रुक क्यों नहीं रहा?और अगर सब ठीक नहीं है तो सीएम को सच बताने से कौन डर रहा है? यह सवाल सिर्फ गुडेली–कटंगपाली का नहीं बल्कि पूरे विभाग की कार्यप्रणाली का आईना है।

To Be Continue…..

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