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रायगढ़ और रायपुर के ‘पुष्पा’ फिर बेनकाब! अंतर्राज्यीय सिंडिकेट गिरफ्त मे…

जंगलों से खैर-तेंदू काटकर फर्जी टीपी के सहारे दूसरे राज्यों तक तस्करी का आरोप, साल भर पुरानी रेड की जांच में खुला अंतर्राज्यीय सिंडिकेटIMG 20260904 WA0026

गढ़उमरिया के गोदाम से शुरू हुई जांच पहुंची संगठित अपराध तक, पुलिस-वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में तीन गिरफ्तार, एक फरार

डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। जंगलों की बेशकीमती लकड़ियों पर कुल्हाड़ी चलवाना, ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर खैर और तेंदू के पेड़ों की कटाई कराना, फिर ट्रैक्टर और पिकअप से लकड़ियों को गोदाम तक पहुंचाना और कथित तौर पर फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट की आड़ में उन्हें छत्तीसगढ़ की सीमा से बाहर खपाना। रायगढ़ में लगभग साल भर पहले वन विभाग की एक कार्रवाई के दौरान सामने आया कथित लकड़ी तस्करी का मामला अब एक बड़े अंतर्राज्यीय सिंडिकेट के रूप में सामने आया है। इसी मामले में पहले “रायगढ़ का पुष्पा” शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद अब पुलिस जांच ने कथित तस्करी नेटवर्क की ऐसी परतें खोली हैं, जिनसे वन संपदा के अवैध कारोबार के बड़े नेटवर्क का संकेत मिल रहा है।

जिला पुलिस और वन विभाग की संयुक्त जांच में रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कथित नेटवर्क से जुड़ा वाहन मालिक भरत कुमार मेश्राम फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज, संगठित अपराध और भारतीय वन अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में लकड़ियों के कथित अवैध कारोबार के तार छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

मामले का खुलासा शुक्रवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, वनमंडलाधिकारी अरविंद पीएम, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा ने किया।

जंगल से गोदाम और गोदाम से दूसरे राज्यों तक कथित नेटवर्क

पुलिस की प्रारंभिक विवेचना के अनुसार रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार सहित आसपास के वन क्षेत्रों से खैर एवं तेंदू प्रजाति की लकड़ियों की अवैध कटाई कराए जाने का आरोप है। जांच में यह बात सामने आई है कि ग्रामीणों को आर्थिक प्रलोभन देकर जंगलों से लकड़ियां कटवाई जाती थीं और इसके बाद उन्हें ट्रैक्टर एवं पिकअप वाहनों के माध्यम से जामटीकरा-गढ़उमरिया स्थित गोदाम तक पहुंचाया जाता था।

पुलिस के अनुसार आरोपी रोहित मित्तल ने गढ़उमरिया स्थित एक गोदाम किराए पर लिया था, जहां कथित रूप से बड़ी मात्रा में लकड़ियों का भंडारण किया जाता था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसके बिजनेस पार्टनर मनीष अग्रवाल तथा परिवहन से जुड़े भरत कुमार मेश्राम और सलाउद्दीन खान की मदद से इस लकड़ी को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। गोदाम में लकड़ियों की छंटाई और अन्य प्रक्रियाओं के बाद उन्हें अधिक कीमत पर बाहर भेजने की कथित योजना बनाई जाती थी।

पुलिस जांच का सबसे गंभीर पहलू लकड़ी के परिवहन में इस्तेमाल किए गए कथित ट्रांसपोर्ट परमिट को लेकर सामने आया है। वन विभाग की कार्रवाई के दौरान आरोपियों की ओर से लकड़ियों के परिवहन से संबंधित टीपी प्रस्तुत किया गया था, लेकिन जांच में उस पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। प्रथम दृष्टया दस्तावेज संदिग्ध पाए जाने के बाद वन विभाग को इस पूरे मामले के पीछे किसी बड़े संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका हुई और विस्तृत जांच शुरू की गई।

साल भर पुरानी रेड से खुला कथित अंतर्राज्यीय कारोबार

इस पूरे मामले की जड़ पिछले वर्ष 5 मई 2025 को हुई वन विभाग की कार्रवाई से जुड़ी हुई है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना मिली थी कि थाना जूटमिल क्षेत्र अंतर्गत जामटीकरा-गढ़उमरिया स्थित एक गोदाम में आसपास के वन क्षेत्रों से खैर एवं तेंदू प्रजाति की लकड़ियों की कटाई कराकर उनका अवैध भंडारण किया जा रहा है।

सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने गोदाम में दबिश दी थी। कार्रवाई के दौरान ट्रक क्रमांक सीजी 15 डीवी-7577 में तेंदू प्रजाति के 42 नग लट्ठे लदे हुए पाए गए, जिनकी मात्रा 1.731 घनमीटर बताई गई। इसके अलावा गोदाम से तेंदू एवं खैर प्रजाति के 146 नग लट्ठे, जिनकी मात्रा 6.741 घनमीटर थी, नौ चट्टा जलाऊ लकड़ी, एक कटर मशीन, एक वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा जब्त किया गया था। कार्रवाई के दौरान गोदाम में मौजूद बताए जा रहे लोग मौके से फरार हो गए थे।

उस समय हुई कार्रवाई के बाद यह मामला रायगढ़ में काफी चर्चित रहा था और कथित अवैध लकड़ी कारोबार को लेकर “रायगढ़ का पुष्पा” शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई थी। अब उसी कार्रवाई के लगभग डेढ़ वर्ष बाद हुई विस्तृत जांच ने मामले को नए और गंभीर मोड़ पर पहुंचा दिया है। वन विभाग की जांच में संदिग्ध दस्तावेजों और कथित संगठित नेटवर्क के संकेत मिलने के बाद पुलिस को विस्तृत विवेचना के लिए आवेदन दिया गया।

वन विभाग की ओर से वन क्षेत्रपाल संजय लकड़ा के माध्यम से 2 सितंबर 2026 को थाना जूटमिल में आवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 490/2026 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 3(5) और 111 सहित भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 42 सहपठित धारा 41 एवं 52 के तहत कार्रवाई शुरू की।

फर्जी टीपी की आड़ में असली खेल?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल ट्रांसपोर्ट परमिट को लेकर खड़ा हुआ है। वन विभाग की रेड के दौरान प्रस्तुत किए गए टीपी पर जारीकर्ता वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार दस्तावेज प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हुआ। इसके बाद यह आशंका गहराई कि कहीं जंगलों से कथित रूप से अवैध रूप से लाई गई लकड़ियों को कागजों का सहारा देकर वैध साबित करने का संगठित खेल तो नहीं चल रहा था।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कथित फर्जी या संदिग्ध ट्रांसपोर्ट परमिट कहां और किसके द्वारा तैयार किए गए, इनका उपयोग कितनी बार किया गया और इनके माध्यम से अब तक कितनी लकड़ी रायगढ़ अथवा छत्तीसगढ़ से बाहर भेजी गई। जांच का दायरा अब केवल गढ़उमरिया के एक गोदाम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लकड़ी की कटाई से लेकर उसके परिवहन और अंतिम खरीदार तक की पूरी श्रृंखला को खंगालने की कोशिश की जा रही है।

जंगल से बाजार तक ऐसे चलता था कथित खेल

पुलिस और वन विभाग की प्रारंभिक जांच में कथित लकड़ी तस्करी का एक संगठित पैटर्न सामने आया है। आरोप है कि सबसे पहले वन क्षेत्रों में खैर और तेंदू प्रजाति के पेड़ों की पहचान की जाती थी। इसके बाद स्थानीय ग्रामीणों को आर्थिक प्रलोभन देकर लकड़ियों की कटाई कराई जाती थी। कटी हुई लकड़ियों को छोटे वाहनों और ट्रैक्टरों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों अथवा गोदामों तक पहुंचाया जाता था। गढ़उमरिया स्थित गोदाम में कथित रूप से लकड़ियों का भंडारण कर उनकी छंटाई और अन्य प्रक्रियाएं की जाती थीं। इसके बाद लकड़ियों को राज्य से बाहर भेजने के लिए ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों का उपयोग किया जाता था। पुलिस को संदेह है कि दस्तावेजों की आड़ लेकर इस अवैध कारोबार को वैध दिखाने का प्रयास किया गया। अब जांच एजेंसियां इस पूरे कथित नेटवर्क में कटाई करने वालों, गोदाम उपलब्ध कराने वालों, परिवहनकर्ताओं, दस्तावेज तैयार करने वालों और लकड़ी खरीदने वाले अंतिम व्यापारियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

एसएसपी ने बनाई विशेष टीम, तीनों आरोपियों पर शिकंजा

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की। टीम ने गोदाम, लकड़ियों के स्रोत, परिवहन व्यवस्था, आरोपियों के आपसी संबंधों और दस्तावेजों की जांच की। पुलिस का दावा है कि विस्तृत तस्दीक के दौरान आरोपियों की कथित भूमिका से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य मिले।

इसके बाद गुरुवार को छापेमारी कर रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों को शुक्रवार को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है। मामले में आरोपी भरत कुमार मेश्राम फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।

क्या केवल चार लोग या पीछे है बड़ा नेटवर्क?

तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या कथित वन तस्करी का यह कारोबार केवल चार व्यक्तियों तक सीमित था अथवा इसके पीछे एक बड़ा अंतर्राज्यीय नेटवर्क सक्रिय था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा और मध्यप्रदेश से लकड़ियों के कारोबार के तार जुड़ने तथा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं अन्य राज्यों तक लकड़ी पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद जांच का दायरा काफी व्यापक हो गया है।

वन संपदा के अवैध कारोबार में कटाई से लेकर परिवहन और बिक्री तक कई स्तरों पर लोगों की भूमिका हो सकती है। इसलिए अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि कथित सिंडिकेट ने कितने समय से काम किया, कितनी मात्रा में लकड़ियां जंगलों से काटी गईं, कितनी लकड़ी दूसरे राज्यों तक पहुंचाई गई और इस कारोबार से किसे कितना आर्थिक लाभ मिला।

साल भर पुरानी कार्रवाई, अब संगठित अपराध की धाराएं

गढ़उमरिया गोदाम में 5 मई 2025 को वन विभाग की रेड के दौरान बड़ी मात्रा में खैर और तेंदू प्रजाति की लकड़ियां तथा लकड़ी काटने और तौलने से संबंधित उपकरण जब्त किए गए थे। उस समय मामले को वन अपराध के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन जांच के दौरान ट्रांसपोर्ट परमिट और लकड़ी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल खड़े होने के बाद मामला गंभीर होता चला गया। अब लगभग डेढ़ वर्ष बाद विस्तृत जांच के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचना से जुड़े अपराध, सामूहिक अपराध और संगठित अपराध की धाराओं के साथ भारतीय वन अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। इससे साफ है कि जांच एजेंसियां इस मामले को केवल अवैध लकड़ी भंडारण की घटना के रूप में नहीं, बल्कि कथित संगठित नेटवर्क के रूप में देख रही हैं।

तीन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में रोहित मित्तल, पिता सुभाष मित्तल, निवासी अग्रसेन कॉलोनी विकास नगर कोतरा रोड रायगढ़, मनीष अग्रवाल, पिता राधेश्याम अग्रवाल, निवासी मकान नंबर 72/1 मुड़पार बलौदाबाजार तथा सलाउद्दीन खान, पिता इलाउद्दीन खान, निवासी सरसींवा जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ को गिरफ्तार किया है। मामले में भरत कुमार मेश्राम फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

रेड में मिला था लकड़ियों का बड़ा जखीरा

वन विभाग द्वारा गढ़उमरिया स्थित गोदाम में की गई कार्रवाई के दौरान ट्रक क्रमांक सीजी 15 डीवी-7577 में तेंदू प्रजाति के 42 नग लट्ठे बरामद किए गए थे, जिनकी मात्रा 1.731 घनमीटर थी। इसके अलावा गोदाम से खैर एवं तेंदू प्रजाति के 146 नग लट्ठे जब्त किए गए, जिनकी मात्रा 6.741 घनमीटर बताई गई। कार्रवाई के दौरान नौ चट्टा जलाऊ लकड़ी, एक कटर मशीन, एक वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा भी जब्त किया गया था। इतनी बड़ी मात्रा में एक ही स्थान पर लकड़ियों और उपकरणों की बरामदगी ने उस समय ही मामले को गंभीर बना दिया था, जबकि अब पुलिस जांच में कथित अंतर्राज्यीय नेटवर्क के संकेत मिलने के बाद कार्रवाई और व्यापक हो गई है।

जांच अभी बाकी, खुल सकते हैं और नाम

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस अब कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। विशेष रूप से लकड़ियों के वास्तविक स्रोत, उन्हें काटने वाले लोगों, परिवहन में प्रयुक्त वाहनों, ट्रांसपोर्ट परमिट तैयार करने वालों और दूसरे राज्यों में लकड़ियों को खरीदने वाले व्यापारियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, उससे आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां अथवा नए नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। रायगढ़ के जंगलों से शुरू होकर दूसरे राज्यों तक पहुंचने वाले कथित वन तस्करी के इस नेटवर्क का असली आकार कितना बड़ा है, इसका जवाब अब पुलिस और वन विभाग की आगे की जांच ही देगी।

कार्रवाई में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन तथा वनमंडलाधिकारी अरविंद पीएम, एसडीओ तन्मय कौशिक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। कार्रवाई में थाना प्रभारी जूटमिल निरीक्षक अभिनव कांत सिंह, थाना प्रभारी पुसौर हर्षवर्धन सिंह बैस, साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, सहायक उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह पटेल, मनमोहन बैरागी, प्रधान आरक्षक सतीश पाठक, लोमेश सिंह राजपूत, आरक्षक तरुण महिलाने और सुशील यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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