छत्तीसगढ़ में आबकारी घोटाले पर सबसे बड़ी गाज: 22 अफ़सर निलंबित, ईमानदारी का ढोल पीटने वाले अलेख सिदार भी शामिल

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2174 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में सरकार ने आखिरकार सबसे बड़ी कार्रवाई की है। नकली होलोग्राम, फर्जी बिल और भारी कमीशन के गोरखधंधे से सरकारी खजाने को हजारों करोड़ का चूना लगाने वाले 22 आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
जांजगीर जिले में पदस्थ आबकारी सहायक आयुक्त अलेख सिदार, जो अक्सर खुद को ईमानदारी की मिसाल बताने में पीछे नहीं रहते थे, उनका नाम भी इस काली सूची में शामिल है। 7 जुलाई को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने 2300 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, उसी दिन राज्य सरकार ने इन सभी के निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
जांच में यह साफ हुआ कि अफ़सरों ने मिलकर नकली होलोग्राम छापे, फर्जी बिलिंग की और शराब ठेकेदारों से मोटा कमीशन खाया। राज्य सरकार को इससे हजारों करोड़ का नुकसान हुआ—लेकिन जिनकी जिम्मेदारी व्यवस्था चलाना था, वही इसे लूट का अड्डा बना बैठे।
सरकार की कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। “ईमानदारी के पैरोकार” अफ़सर अब कटघरे में हैं। EOW की जांच और कोर्ट में दाखिल चार्जशीट ने इनकी पोल खोल दी है। आने वाले दिनों में और भी बड़े नामों का खुलासा होना तय माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने साफ किया है कि घोटाले के हर जिम्मेदार चेहरे पर कानून का शिकंजा कसेगा। सवाल यह भी है कि इतने बड़े घोटाले के दौरान इतने साल तक अफ़सरों के इस खेल को किसने बचाया? क्या ऊपर तक मिलीभगत थी?



























