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फर्जीवाड़े का पर्दाफाश: कलेक्टर और खनिज अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से फ्लाई ऐश भराव की इजाजत, 3 आरोपी गिरफ्तार



सक्ति (छत्तीसगढ़)।
सक्ति जिले के थाना बाराद्वार पुलिस ने कलेक्टर और जिला खनिज अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर और सील का इस्तेमाल कर सरकारी भूमि पर अवैध रूप से फ्लाई ऐश भराव कराने के मामले का खुलासा किया है। इस बड़े फर्जीवाड़े में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर अपराधियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?

23 जनवरी 2025 को खनिज अधिकारी किशोर कुमार बंजारे ने थाना बाराद्वार में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, कलेक्टर सक्ती को वॉट्सएप पर कूटरचना (फर्जी दस्तावेज) का संदेश मिला। जांच में पता चला कि आरोपी राजुकमार कुर्रे ने ग्राम पंचायत डूमरपारा में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से फ्लाई ऐश भराव करने के लिए फर्जी पत्र तैयार कर खनिज अधिकारी के हस्ताक्षर और कलेक्टर की सील का इस्तेमाल किया।

आरोपियों के नाम और भूमिका

पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है:

1. राजुकमार कुर्रे (43), निवासी औरदा, थाना खरसिया, जिला रायगढ़।


2. लखन डेंजारे (36), निवासी ब्लॉक कॉलोनी मदनपुर, थाना खरसिया, जिला रायगढ़।


3. युवराज बंजारे (32), निवासी सतनामी पारा, तेलीकोट, जिला रायगढ़।



इन तीनों ने मिलकर कलेक्टर और खनिज अधिकारी की सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर सरकारी जमीन (खसरा नंबर 2338, 2143/1, और 2340) पर अवैध फ्लाई ऐश भराव की अनुमति जारी की।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश यादव, और अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) मनीष कुंवर के मार्गदर्शन में आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान तीनों ने अपना अपराध कबूल कर लिया।

थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी अनवर अली और उनकी टीम का अहम योगदान रहा। टीम में सउनि नजीर हुसैन, प्रआर मनीष राजपूत, आरक्षक योगेश राठौर, रामकुमार यादव, योगेश साहू, मधु लाल सिदार, गौतम तेन्दुलकर और कंचन सिदार शामिल थे।

न्यायिक प्रक्रिया जारी

गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

इस मामले ने दिखा दिया कि फर्जी दस्तावेज और सील के जरिए सरकारी जमीन का दुरुपयोग कितना खतरनाक हो सकता है। पुलिस की तेज कार्रवाई से यह बड़ा फर्जीवाड़ा समय रहते रुक गया।

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