कांकेर, बस्तर / जिले के कांकेर क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें पुलिसकर्मियों पर पत्रकार कमल शुक्ला से थाने में मारपीट करने का आरोप लगा है। यह आरोप आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने सोशल मीडिया पर घटना की जानकारी साझा करते हुए लगाया। उनके अनुसार, पत्रकार कमल शुक्ला दिवाली के दूसरे दिन कांकेर के एक अवैध गैस गोदाम की शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

घटना का पूरा विवरण
जानकारी के अनुसार, कांकेर में एक अवैध गैस गोदाम चल रहा था, जिसमें दिवाली के दिन आग लग गई थी। आग की इस घटना ने आसपास की बस्ती में खतरनाक स्थिति उत्पन्न कर दी थी, जिससे वहां के लोगों की जान-माल को खतरा हो सकता था। इसी के चलते पत्रकार कमल शुक्ला अवैध गोदाम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे थे।
आरटीआई कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने बताया कि जब कमल शुक्ला थाने में शिकायत लेकर पहुंचे, तो दो पुलिसकर्मियों ने उत्तेजित होकर उन पर हमला कर दिया और मारपीट की। इस हिंसक घटना के दौरान कमल शुक्ला को इतनी चोटें आईं कि उनकी दृष्टि पर भी इसका असर पड़ा। घटना के बारे में और खुलासा करते हुए कुणाल शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध गैस गोदाम पुलिसकर्मियों के संरक्षण में संचालित हो रहा था और इस गोदाम से पुलिसकर्मियों को नियमित तौर पर ‘हफ्ता’ दिया जाता था, जिसकी मोटी रकम ऊपर के अधिकारियों तक भी पहुंचाई जाती थी।
गृहमंत्री को दी गई जानकारी, पर नहीं हुई कार्यवाही
कमल शुक्ला ने मीडिया को बताया कि इस घटना की जानकारी उन्होंने प्रदेश के गृहमंत्री को दी थी, ताकि मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ उचित कार्यवाही हो सके। हालांकि, अब तक इस मामले में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही नहीं की गई है। उल्टा, कमल शुक्ला पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे उन्हें न्याय मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।
कुणाल शुक्ला ने सोशल मीडिया पर इस घटना का विवरण साझा करते हुए लिखा कि पत्रकारों पर इस तरह का हमला प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार अवैध कार्यों की शिकायत करने में खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे, तो समाज में अन्याय और अपराध को उजागर करना कठिन हो जाएगा। कुणाल शुक्ला ने प्रदेश की सरकार और प्रशासन से मांग की है कि दोषी पुलिसकर्मियों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए, ताकि पत्रकारों के खिलाफ इस प्रकार की घटनाएं दोबारा न हों।
अवैध गतिविधियों के संरक्षण के आरोप
इस घटना के बाद पुलिस विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी चर्चाएं हैं कि कांकेर क्षेत्र में पुलिस की मिलीभगत से अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिनमें अवैध गैस गोदाम जैसे संवेदनशील कार्य भी शामिल हैं। इन गोदामों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता, जिससे बस्तियों में बड़ा खतरा बना रहता है। ऐसे में पुलिसकर्मियों पर अवैध गोदाम संचालकों से पैसे लेने और उन्हें संरक्षण देने के आरोप लगे हैं। यह आरोप पत्रकार कमल शुक्ला द्वारा उठाए गए मुद्दों की गंभीरता को दर्शाते हैं।
घटना के बाद पत्रकारों में रोष
इस घटना के बाद पत्रकार संगठनों में रोष व्याप्त है। प्रेस क्लब और कई पत्रकार संघों ने इस घटना की निंदा की है और मामले में न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि अगर पत्रकारों को ऐसे मामलों में पुलिस से सुरक्षा नहीं मिलती है, तो उनके लिए अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना मुश्किल हो जाएगा। पत्रकारों ने इसे प्रेस स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है।
निष्पक्ष जांच और कार्यवाही की मांग
पत्रकार कमल शुक्ला की इस घटना के बाद समाज के विभिन्न वर्गों से भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस को अपने कार्य में निष्पक्ष होना चाहिए और किसी भी प्रकार के अवैध कार्यों में शामिल नहीं होना चाहिए। लोगों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि पत्रकारों और आम जनता के साथ न्याय हो सके और ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।
कुल मिलाकर, कांकेर के पत्रकार कमल शुक्ला पर हुए इस हमले ने पत्रकारिता जगत में एक गहरी चिंता पैदा कर दी है। पत्रकारों का कहना है कि अगर दोषी पुलिसकर्मियों पर जल्द कार्यवाही नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।



























