Damrua

Raigarh : जेल में मौत या सिस्टम का खेल? संजय बघेल की मौत पर उठे भ्रष्टाचार और लापरवाही के सवाल

जिला जेल में बंद युवक की मौत से उठे गंभीर सवाल
परिजनों का आरोप- रिश्वतखोरी और लापरवाही ने ली जान, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

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डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। कोतरा रोड थाना क्षेत्र के ग्राम नावापारा निवासी संजय बघेल की जेल में बंद रहने के दौरान हुई मौत ने पूरे मामले को संदेहों के घेरे में ला खड़ा किया है। इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाए जाने के बाद हुई मौत को लेकर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं तथा कई सवाल प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने खड़े हो गए हैं।
मृतक के परिजनों का कहना है कि संजय बघेल की मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई है। उनका आरोप है कि मामले में कुछ तथ्य ऐसे हैं जिनकी गहन जांच आवश्यक है। परिजनों ने एक पुलिसकर्मी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
जेल जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली व्यवस्था के भीतर एक बंदी की मौत ने सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं जिनके कारण एक व्यक्ति की जान चली गई। उनका आरोप है कि मामले की सच्चाई सामने लाने के बजाय तथ्यों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, इसलिए न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।
घटना के बाद मृतक के गांव और आसपास के क्षेत्रों में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही, भ्रष्टाचार या अधिकारों का दुरुपयोग हुआ है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों ने प्रशासन से पारदर्शी जांच कर दोषियों को बेनकाब करने की मांग की है।
इधर प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मामले की जांच प्रक्रिया जारी है और विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील बना दिया है।
फिलहाल संजय बघेल की मौत कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जेल से मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने की नौबत क्यों आई और ऐसी कौन-सी परिस्थितियां थीं जिनके कारण एक बंदी की मौत हो गई। अब पूरे जिले की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल एक सामान्य मौत थी या इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही अथवा साजिश छिपी हुई है।

मौत के बाद उठ रहे हैं कई अनुत्तरित सवाल

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संजय बघेल की मौत के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर कई ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं जिनका जवाब अब तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाया है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जेल में बंद रहने के दौरान उनकी तबीयत आखिर किन परिस्थितियों में बिगड़ी और क्या उन्हें समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। परिजनों द्वारा एक पुलिसकर्मी पर रिश्वत लेने का आरोप लगाए जाने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। लोगों के मन में यह भी सवाल है कि क्या कहीं किसी स्तर पर लापरवाही, नियमों की अनदेखी अथवा कर्तव्य निर्वहन में चूक हुई है। यदि ऐसा हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। वहीं जेल प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पूरे मामले में मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा अब जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा, लेकिन फिलहाल अनेक सवालों के जवाब जांच एजेंसियों के सामने चुनौती बने हुए हैं।

न्याय की मांग को लेकर मुखर हुए परिजन और ग्रामीण

संजय बघेल की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच नहीं होगी, तब तक मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां सामने नहीं आ पाएंगी। परिजनों ने कथित रिश्वतखोरी के आरोपों की अलग से जांच कराए जाने की मांग उठाई है और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की अपेक्षा जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जेल जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली व्यवस्था के भीतर किसी व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है तो यह बेहद गंभीर विषय है और इसकी न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए। लोगों का मानना है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने से ही पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सकेगा। इसी कारण अब पूरे क्षेत्र की निगाहें जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।

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