छत्तीसगढ़ डायोसिस पदाधिकारियों द्वारा की गई शिकायत फर्जी है, दस्तावेजों के पड़ताल हुआ भंडाफोड़
यह सभी को जानना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ के मिशन स्कूलों के संचालन का दो पक्षो का विवाद जारी है। मिशन के स्कूल लगभग 100 वर्ष पुराने है जबकि छत्तीसगढ़ में शिक्षा समिति का पंजीयन 2010 में किया गया। वर्तमान में समिति के निर्वाचन व शाला संचालन का मामला माननीय उच्च न्यालय में लंबित है।

फिर भी इस बीच अवैध चुनाव कर पदाधिकारी बने विपक्षी दल के स्वयंभु पदाधिकारी जयदीप रॉबिन्सन, सुषमा कुमार एवं नितिन लॉरेन्स द्वारा शालाओ में अवैध कब्जा करने के लिए शासन प्रसाशन विशेष रूप से मुख्यमंत्री जी को गुमराह कर फर्जी शिकायत कर समय बर्बाद करते रहते है, ताकि अपने अपराधों को इन शिकायतो की चादर में छुपा सके।
*दस्तावेजों के आधार पर सिलसिलेवार सत्यता की करते है पड़ताल*
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (पंजी.2937) के दो पक्षो के विवाद का मामला 2023-24 से न्यालय फर्म्स एवं संस्थाए रायपुर छत्तीसगढ़ में चल रहा था, उस वक्त संस्था के भ्रष्टाचार व अवैध संचालन की शिकायत पूर्व सचिव शशिवाघे, उपाध्यक्ष अतुल आर्थर व कोषाध्यक्ष व्ही.के सिंह के द्वारा किया गया। दर्ज की गई शिकायत सही पाए जाने पर पंजीयक ने 5.12.2024 को जयदीप रॉबिन्सन की समिति के नीतिगत कार्यो में स्थगन/रोक लगा दिया। फिर भी समिति के पदाधिकारी जो न्यालय को ढेंगा दिखाते हुवे जारी आदेश का भी पालन नही करते थे, उक्त पदाधिकारियों ने कई स्कूलों के शिक्षकों व प्राचार्यो को बदले की भावना से प्रताड़ित करते हुवे निलंबित व बर्खास्त करने लगे जिस पर पुनः पंजीयक के पास कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की गुहार लगाई गई, जिस पर न्यालय की अवमानना मानते हुवे पंजीयक ने दिनाँक 18.09.2025 को आदेश पारित कर पदाधिकारियों (जयदीप रॉबिन्सन, सुषमा कुमार व नितिन लॉरेन्स ) द्वारा लिए समस्त निर्णय को आदेश पृ क्रमांक/अपील-511/306/25 नवा रायपुर दिनाँक 18.09.2025 द्वारा निरस्त कर दिया, यह समिति के मुह पर जोरदार तमाचा था। याचिका के अंतिम सुनवाई पश्चात पंजीयक ने दिनाँक 29.09.2026 को 22 पेज के स्पीकिंग ऑर्डर क्रमांक/अपील-511/1419/25 नवा रायपुर 29.09.2025 में लिखा कि नितिन लॉरेन्स, जयदीप रॉबिन्सन व सुषमा कुमार व अन्य की समिति द्वारा प्रायोजित रूप से 2024 में पदाधिकारियों की सूची धारा-27 प्राप्त किया है अतः शशिवाघे गुट की अपील को सही पाए जाने पर पंजीयक द्वारा कठोर निर्णय लेते हुवे *सुषमा कुमार व जयदीप रॉबिन्सन की समिति को निरस्त (भंग) कर दिया*, व 2022 की शशिवाघे की समिति जिसमे कोई विवाद नही था को पुनर्जीवित कर चुनाव कराने के लिए आदेशित किया व निर्वाचन की रिपोर्ट फर्म्स एवं संस्थाए को जमा करने हेतु अधिकृत किया। इस आदेश के विरुद्ध जयदीप व टीम ने माननीय उच्च न्यालय का दरवाजा खटखटाया कोर्ट ने कोई राहत नही दी। बल्कि अपने दिनाँक 13.10.2025 के आदेश में यह लिखा कि शशि वाघे की समिति ने चार्ज लेकर कार्यभार संभाल लिया है, समिति द्वारा अपनी 3.10.2025 की पहली बैठक के कार्यवाही का मिनट्स भी माननीय उच्च न्यालय व फर्म्स एवं संस्थाए में जमा किया जिसे न्यालय ने स्वीकार किया, न्यालय ने 14.10.2025 के आदेश में जयदीप व नितिन के अपील को बिना राहत दिए खारिज कर दिया। बाद में माननीय न्यालय के इस आदेश के पश्चात जयदीप गुट ने शासन के पास अपील किया जिसके अंतिम आदेश क्रमाक/एफ 4-13/2025/11/6 नवा रायपुर दिनाँक 04.12.2025 में उपसचिव ने पंजीयक के आदेश को क्वेश न करते हुवे प्रसाशक नियुक्त कर 30 दिनों में चुनाव करवाने का आदेश दिया। अब जबकि पंजीयक के आदेश अनुसार 2022 की समिति के साथ प्रसाशक को चुनाव करवाना था परन्तु प्रसाशक ने समिति के बायलॉज के विरुद्ध *निरस्त कमेटी* के सदस्यों के साथ चोरीछुपे एकतरफा लाभ देने के लिए चुनाव करा लिया व उसकी रिपोर्ट सोसायटी में ऑनलाइन जमा कर दिया। अवैध फर्जी और एकपक्षीय चुनाव के विरोध में समिति के उपाध्यक्ष अतुल आर्थर ने माननीय उच्च न्यालय बिलासपुर में रिट WPC-No 1362/2026 लगाकर याचिका दर्ज किया है जो वर्तमान में लंबित है।
*क्या है असल मामला मिशन स्कूल गौरेला का*
समिति के झगड़ो में स्कूलों के कर्मचारी पिस रहे है। बदले की भावना से समिति द्वारा अवैध तरीके से कार्यवाही की जा रही है। भावना आर्थर 2017-18 से प्रभारी प्राचार्य के पद पर कार्यरत है। जयदीप व नितिन की समिति सीडीबीई पर फर्म्स एवं संस्थाए द्वारा दिनाँक 5.12.2024 के अनुसार स्थगन आदेश था फिर भी अनाधिकृत तरीके से तथाकथित जयदीप रॉबिन्सन द्वारा भावना आर्थर को प्राचार्य पद से हटाने की कार्यवाही कर जानबूझकर मिडिल स्कूल के कनिष्ठ शिक्षक सुनील श्रीवास को शिक्षा विभाग के नियम विपरीत हायर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य पद पर ताला तोड़कर बैठा दिया गया था, बाद में फर्म्स सोसायटी द्वारा आदेश की अवहेलना (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) मानते हुवे दिनाँक 18.09.2025 के आदेशानुसार समस्त निलंबन/बर्खस्तगी व अन्य आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया था, *इस तरह भावना आर्थर न्यालय के उक्त आदेश पर वापस पदस्त है व वर्तमान तक यही प्राचार्या है*। शाला के सभी विद्यार्थियों विशेषकर बोर्ड के विद्यार्थियों का भविष्य पूर्णतः सुरक्षित है, कोई भी अनाधिकृत व फर्जी दस्तावेज नही बनाये गए है। *शिकायतकर्ताओं द्वारा जीपीएम जिले की शांत फिजा में भ्रम उतपन्न कर जहर घोलना चाहते है, प्रसाशन को चाहिए कि उक्त लोगो पर 8 गम्भीर अपराध में एफआईआर दर्ज है कुछ और होने वाले है इनको जीपीएम जिले से जिला बदर की कार्यवाही की जाए।* असल मे जयदीप द्वारा नियमविपरित बनाये गए प्राचार्य सुनील श्रीवास पर शाला के ही बालिकाओं और महिला शिक्षिकाओं के साथ लैंगिक प्रताड़ना का आरोप है, शाला की लैंगिक प्रताड़ना निवारण समिति में भी अपराध सिद्ध हुआ है व पुलिस में जांच जारी है, सुनील को बचाने के लिए ही मुख्यमंत्री व उच्च अधिकारियों के समक्ष मुद्दों से गुमराह कर फर्जी शिकायत की जा रही है।
*जिला शिक्षा अधिकारी की कर्तव्यनिष्ठता पर प्रश्न चिन्ह लगाना गलत*
पूर्व में किये गए शिकायतो पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच समिति बना कर पूर्ण पारदर्शिता व निष्पक्षता के साथ जांच कराया गया है, और रिपोर्ट प्रस्तुत किया है, जिला शिक्षा अधिकारी ने नियमानुसार ही जांच किया है उन पर आरोप लगाना गलत है।
*आइये जाने क्या है शिकायतकर्ताओं का इतिहास*
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे यह कहावत शिकायतकर्ताओ पर सही बैठती है
शिकायतकर्ता जयदीप रॉबिन्सन, नितिन लॉरेन्स व सुषमा कुमार शिक्षा समिति के अनाधिकृत पदाधिकारी बन बैठे है, ये सभी आपराधिक प्रवित्ति के लोग है, इनके खिलाफ छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में 8 गम्भीर व संवेदनशील धाराओं में एफआईआर दर्ज है। सीडीबीई समिति के ही अवैध संचालन पर इनके ऊपर सिविल लाइंस रायपुर में धारा 420, 467,468,471, 34 पर एफआईआर दर्ज है, और ये लोग *सशर्त जमानत पर है* इनके स्कूलों में बालात प्रवेश करना माननीय न्यालय की अवमानना है, पर उक्त लोग कानून को अपनी मुट्ठी पर रखते है। ये लोग जमीन के दलाल है, कुछ दिन पहले ही बिलासपुर में न्यालय ने जयदीप रॉबिन्सन पर फर्जी तरीके से बिलासपुर जरहाभाठा की संस्था की जमीन बेचने पर एफआईआर दर्ज कर लिया गया है, और छत्तीसगढ़ के मसीही समाज द्वारा जयदीप को गिरिफ्तार करने की मांग कर रही है। *उक्त पदाधिकारी शिक्षा के मंदिर में बैठ कर भूमाफिया का काम करते है। लोग अन्य स्थानों की तरह जीपीएम जिले की मिशन की जमीन पर कब्जा कर बेचना चाहते है।,* ये ब्लेकमेलर है, गुंडागर्दी करते है , शिक्षा के मंदिर में बालात प्रवेश कर दादागिरी करते है, पेंड्रारोड न्यालय में भी मिशन स्कूल में अगस्त 2025 में बालात घुसकर ताला तोड़ने पर परिवाद की याचिका दर्ज हो चुकी है। डायोसिस के इन्ही पदाधिकारियों ने पूर्व में भी सालेम स्कूल रायपुर, सेंट पॉल्स स्कूल रायपुर, बर्जेस स्कूल बिलासपुर में रात में ताला तोड़कर शाला में कब्जा कर चुके है, और एकसाथ 32 कर्मचारियों को नियम विपरीत बर्खास्त कर दिए है, और अभी इस कोशिश में है कि सेंट थॉमस स्कूल भिलाई, रैम्बो मेमोरियल स्कूल मुंगेली, मिशन स्कूल गौरेला में भी प्रसाशन को धोखे में रखकर दादागिरी व गुंडागर्दी करके स्कुलो में कब्जा किया जाए । ये लोग कहते है छत्तीसगढ़ के मंत्री और पुलिस हमारी जेब मे है, जिससे पूरे मसीही समाज मे क्रोध है।
*जानिए जिस पंजीयक के वर्तमान 13 जुलाई के आदेश से शालाओ में कब्जा करना चाहते है वह क्या है?*
अवैध चुनाव कर अनाधिकृत पदाधिकारी बनकर सुषमा कुमार टीम पेंड्रारोड़, मुंगेली, भिलाई , रायपुर व बिलासपुर में कलेक्टोरेट व शिक्षा विभाग में पंजीयक के एक आदेश को जो 13.07.2026 को जारी किया गया है लेकर घूम रहे है, असल मे उस आदेश को अपनी समिति के चुनाव को मान्यता बता रहे है, जबकि उस आदेश में सिर्फ यह लिखा है कि निर्वाचन की रिपोर्ट को ऑनलाइन रिकॉर्ड में लिया जाता है जबकि माननीय पंजीयक ने *उक्त आदेश में यह भी स्पष्ट लिखा है कि यह आदेश माननीय उच्च न्यालय के निर्णय के अधीन रहेगा।* सोचने वाली बात यह है कि निर्वाचन की वैधता पर जब मामला लंबित है तो फिर आप ही सोचिए अवैध चुनाव के पदाधिकारियों को पंजीयक साहब मान्यता कैसे दे सकते है?? *पंजीयक माननीय न्यालय से बड़े तो नही, और तो और पंजीयक स्वयं उक्त केस में रेस्पॉडेन्ट है, अब साहब का यह आदेश भी न्यालय में प्रस्तुत किया जा रहा है ।* इस तरह सुषमा कुमार , जयदीप रॉबिन्सन, नितिन लॉरेन्स पंजीयक के जिस पत्र को अपनी मान्यता का प्रमाण पत्र मान रहे है वह उनकी समझ का फेर है। मामला माननीय न्यालय में लंबित है हम सब उसका सम्मान करते है।
*छत्तीसगढ़ डायोसिस बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष अजय जॉन व सचिव अतुल आर्थर, शशिवाघे ने सम्पूर्ण जानकारी देते हुवे कहा कि अपंजीकृत छत्तीसगढ़ डायोसिस में भ्रष्टाचारी लोग पद पर बैठे है, जिनके विरुद्ध आंदोलन जारी है। इसीलिए अपने अपराधों को छुपाने के लिए और हमारे लोगो को फंसाने के लिए इस तरह के फर्जी शिकायत करते रहते है, हमने कोई फर्जी दस्तावेज नही बनाये है, शालाये शांति से चल रही है। पर हम किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार है।*






