Damrua

14 खदानों ने छह महीने में नहीं काटी एक भी ऑनलाइन टीपी, खनिज विभाग की फटकार के बाद अब शुरू होगा काम

रायगढ़। जिले की गौण खनिज खदानों में परिवहन अनुमति (टीपी) के नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। खनिज विभाग की समीक्षा में पता चला कि 29 में से 14 खदानों ने पिछले छह महीनों में एक भी ऑनलाइन टीपी जारी नहीं करवाई। इस पर जिला खनिज अधिकारी ने संबंधित पट्टेदारों को फटकार लगाई है और तुरंत आईडी बनवाकर टीपी जारी करने के निर्देश दिए हैं।

 

अप्रैल से बदला था नियम

 

विभाग ने अप्रैल 2026 से गौण खनिज खदानों में मैन्युअल टीपी की व्यवस्था बंद कर दी थी। सभी खदान संचालकों को लॉगिन आईडी दी गई और ऑनलाइन टीपी जनरेट करना अनिवार्य किया गया। संचालकों की पुरानी मैन्युअल टीपी जमा कराकर उतनी मात्रा पोर्टल पर उनके पट्टे के नाम दर्ज कर दी गई थी। इसके बाद मैन्युअल टीपी से खनिज का परिवहन नहीं हो सकता था। जिले में लाइमस्टोन, डोलोमाइट, क्वार्टजाइट, मिट्टी, साधारण पत्थर और फायरक्ले की कुल 29 खदानें संचालित हैं। इनमें से 15 ने नई व्यवस्था अपना ली, लेकिन बाकी 14 ने इसे नजरअंदाज किया।

 

किन पट्टों ने नहीं जारी की टीपी

 

बताया जा रहा है कि इन खदानों में महेश कुमार गर्ग (बानीपाथर), अशोक अग्रवाल (कलमीपाट), रमा गर्ग (चोढ़ा), आराध्या मिनरल्स (आड़पथरा), राधामाधव क्रशर, श्रीजी इंफ्रास्ट्रक्चर (चोढ़ा), विजय कुमार अग्रवाल (तेजपुर, धरमजयगढ़), उमेश अग्रवाल (लैलूंगा), मारुति स्टोन क्रशर (गहनाझरिया), यंगटी इंटरप्राइजेस, अनिल अग्रवाल (लिप्ती), रवींद्र अग्रवाल (फुटहामुड़ा) और संजय मित्तल (कुरुंजखोल) शामिल हैं। आरोप है कि इन पट्टों का खनिज बिना टीपी के भेजा जाता रहा, और कई बार पकड़ से बचने के लिए दूसरी खदान की टीपी का इस्तेमाल किया गया।

 

एनएच निर्माण में भी बिना टीपी की गिट्टी

 

खबर के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कर रही श्रीजी इंफ्रास्ट्रक्चर ने बिना टीपी वाली गिट्टी का उपयोग कर लिया। इस सड़क का काम कई साल से चल रहा है। विभाग अब पिछले छह महीनों के खनन और परिवहन की जांच कर रहा है, जिसमें बड़ी गड़बड़ी उजागर होने की आशंका है।

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