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बंसल बंधुओं पर लगातार शिकंजा: 420, धमकी, अवैध सड़क, खदान अतिक्रमण और 11 करोड़ की ठगी का गंभीर आरोप

डमरूआ न्यूज, रायगढ़।

रायगढ़ के नामी उद्योगपति मुकेश बंसल और नानक बंसल इन दिनों कानून के घेरे में बुरी तरह से फंसे हुए हैं। बार-बार सामने आ रहे आपराधिक मामलों ने उनके कारोबार और छवि दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक चार अलग-अलग एफआईआर बाराद्वार थाना में दर्ज की जा चुकी हैं और हर एक मामला न केवल गंभीर प्रकृति का है, बल्कि इसमें ठगी, अतिक्रमण, धमकी और पर्यावरण नियमों का घोर उल्लंघन जैसे आरोप शामिल हैं।


🔶 मामला 1:  एग्रीमेंट उल्लंघन और सीना जोरी ( भा. दं. सं.  420, 506, 34)

रायगढ़ निवासी रघुवीर सिंह सिसोदिया द्वारा बाराद्वार थाना में की गई शिकायत के अनुसार, मुकेश बंसल और नानक बंसल ने गुरु श्री मिनरल्स प्रा. लि. के नाम से छितापड़रिया स्थित भूमि (खसरा नंबर 5/2 और 5/20, कुल 25 एकड़) पर डोलोमाइट खनन के लिए 30 वर्षों का करार किया था।

आरोप है कि करार की शर्तों का उल्लंघन करते हुए बंसल बंधुओं ने फ्लाई ऐश से खदान पटवाने की अनुमति ले ली और प्रार्थी को न तो कोई भुगतान किया और न ही जानकारी दी।

जब इस पर आपत्ति दर्ज की गई, तो बंसल बंधुओं ने रघुवीर सिंह को जान से मारने की धमकी दी। एफआईआर में बताया गया है कि आरोपीगण ने भारी वाहनों का अवैध आवागमन शुरू कर दिया और स्टाफ रूम व टोल गेट बनाकर भूमि पर अतिक्रमण कर लिया, जिससे प्रार्थी की खेती चौपट हो गई।


🔶 मामला 2: जमीन रजिस्ट्री न कर 11 करोड़ रुपये की ठगी ( भा. दं. सं.  420, 34)

निवेश प्रताप सिंह और अन्य आवेदकों द्वारा की गई शिकायत में आरोप है कि नानक और मुकेश बंसल ने छितापड़रिया स्थित भूमि (खसरा नंबर 30/5 व 30/4) खनन योग्य दिखाकर बेची, लेकिन मौके पर भूमि कम निकली और बाकी पर अन्य किसानों का कब्जा था।

प्रार्थियों से 11 करोड़ रुपये की राशि ले ली गई, पर रजिस्ट्री नहीं की गई। यहां तक कि जिस जमीन से रास्ता दिया जाना था, वह भी रघुवीर सिंह और मधुसूदन सिसोदिया की निजी भूमि थी, जिनसे रास्ते की अनुमति नहीं ली गई। एफआईआर के अनुसार बंसल बंधु उसी भूमि को अन्य लोगों को भी बेचने की कोशिश कर रहे हैं।


🔶 मामला 3: मंगल मिनरल्स खदान में धमकी और गाली-गलौज (BNS  296, 351(2),3(5) )

गणेश राम चंद्रा ने शिकायत दी कि मुकेश बंसल द्वारा संचालित मंगल मिनरल्स की डोलोमाइट खदान बिना सुरक्षा उपायों के बंद कर दी गई। जब इस पर आपत्ति की गई, तो मुकेश बंसल और मैनेजर निर्मल अग्रवाल ने फोन पर गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी दी।
इस मामले में BNS की धारा 296, 351(2) और धारा 3(5) के तहत केस दर्ज हुआ।


🔶 मामला 4: रिजर्व फॉरेस्ट में अवैध सड़क निर्माण

 डोलोमाइट परिवहन के लिए बंसल बंधुओं ने रिजर्व फॉरेस्ट के भीतर से बिना वन विभाग की अनुमति के सड़क बना दी। ग्राम पंचायत से सहमति लेने की बात सामने आई है, लेकिन यह वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का गंभीर उल्लंघन है।

जैसे ही DFO को मामले की जानकारी मिली, वे स्वयं मौके पर पहुंचे और JCB से पूरी सड़क को उखड़वाया। लेकिन अब सवाल है — क्या केवल सड़क हटाने से सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई और पर्यावरणीय अपराध माफ हो जाएंगे?कानूनी धाराएं और संभावित परिणाम

अपराध लागू धाराएं
ठगी (₹11 करोड़) IPC 420, 34
धमकी और गाली-गलौज BNS 296, 351(2), 3(5)
अवैध खनन और अतिक्रमण IPC 447, Forest Act
धोखाधड़ी IPC 420, BNS 316
बिना अनुमति निर्माण Forest Conservation Act, 1980

प्रशासन पर दबाव और जनता की निगाहें

अब जनता और स्थानीय पर्यावरण संगठन मांग कर रहे हैं कि:

  • सीबीआई या ईडी जांच कराई जाए
  • खनिज विभाग और राजस्व विभाग की संलिप्तता की जांच हो
  • संपत्ति कुर्की की कार्रवाई की जाए
  • भूमि वापस ली जाए या मुआवजा वसूला जाए

बंसल बंधु अब केवल एक कारोबारी समूह नहीं, बल्कि एक ऐसे विवाद के केंद्र में हैं, जिसमें पर्यावरणीय, आर्थिक और आपराधिक सभी आयाम जुड़े हैं। आने वाले समय में इन मामलों की निष्पक्ष, तेज़ और न्यायिक जांच प्रशासन की जवाबदेही का परीक्षण करेगी।

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