बेदर्दी औद्योगिक विकास से रायगढ़ की सांस छीन रहे हालात, प्रायोजित विरोध और समर्थन के शोर में दम तोड़ती जनभागीदारी
डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जारी आधिकारिक सूचना ने एक बार फिर रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में बड़े औद्योगिक विस्तार की तैयारी को उजागर कर दिया है। पर्यावास भवन, सेक्टर-19, नया रायपुर अटल नगर स्थित कार्यालय से जारी इस सूचना में मैसर्स शांभवी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्टील प्लांट के बड़े पैमाने पर विस्तार की योजना का उल्लेख है, जिसके तहत स्पंज आयरन, पावर प्लांट, फेरो एलॉय और ब्रिक निर्माण इकाइयों को बढ़ाया जाना प्रस्तावित है। इस परियोजना के लिए 21 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे ग्राम-तमनार, तहसील-तमनार, जिला-रायगढ़ में जनसुनवाई निर्धारित की गई है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जनसुनवाई वास्तव में जनता की आवाज सुनने का मंच है या केवल एक औपचारिक प्रक्रिया। हालात यह संकेत दे रहे हैं कि बेदर्दी औद्योगिक विकास से रायगढ़ की सांस छीन रहे हैं और यह जनसुनवाई अब जबरदस्ती की औपचारिकता बनकर रह गई है। क्षेत्र पहले ही कोल माइंस, डोलोमाइट खदानों और क्रशर इकाइयों के कारण प्रदूषण की मार झेल रहा है, और अब इस नए विस्तार से स्थिति और भयावह होने की आशंका है।
सूचना में उल्लेख है कि इस परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जनसुनवाई अनिवार्य है, और प्रभावित नागरिक 30 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां एवं सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ऐसे मंचों पर आम नागरिक की आवाज शायद ही प्रभावी ढंग से सुनी जाती हो। प्रायोजित विरोध और समर्थन के स्वरों में रायगढ़ के पर्यावरण का दम घुट रहा है, जहां असली प्रभावितों की समस्याएं भीड़ और प्रबंधन के बीच कहीं खो जाती हैं।
तमनार और आसपास के गांवों में पहले से ही हवा और पानी की गुणवत्ता गिर चुकी है। स्थानीय लोगों में सांस, त्वचा और अन्य बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं, वहीं खेती और जल स्रोत भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक और औद्योगिक तंत्र लगातार विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरणीय संतुलन से अधिक प्राथमिकता आर्थिक लाभ को दी जा रही है।
क्या कहती है आधिकारिक सूचना
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जारी सूचना में मैसर्स शांभवी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के स्टील प्लांट विस्तार का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें 2×350 टीपीडी डीआरआई किल्न, 2×10 मेगावाट पावर प्लांट, 1×10 मेगावाट एफबीसी पावर प्लांट, 1×9 एमवीए फेरो एलॉय यूनिट और अन्य उत्पादन इकाइयों के विस्तार का उल्लेख किया गया है।
जनसुनवाई या औपचारिकता
21 अप्रैल 2026 को तमनार में प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष है। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया पहले से तय परिणामों को वैधता देने का माध्यम बन चुकी है, जहां वास्तविक विरोध को दबाने और समर्थन दिखाने के लिए प्रायोजित भीड़ का सहारा लिया जाता है।
पर्यावरण और जनजीवन पर असर
लगातार बढ़ते औद्योगिक दबाव ने रायगढ़ के पर्यावरण को गंभीर संकट में डाल दिया है। वायु और जल प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है। खेती और जल स्रोतों के क्षरण ने ग्रामीण जीवन को भी असुरक्षित बना दिया है, लेकिन इसके बावजूद विस्तार की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है।