सारंगढ़-बिलाईगढ़ के ग्राम बोंदा में अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।
क्रेशर विस्तार की खबर के साथ ही गांव में विरोध की लहर तेज हो गई है, और अब जनसुनवाई को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
आर्यन मिनरल क्रेशर के प्रस्तावित विस्तार को लेकर अब ग्राम बोंदा केंद्र में आ गया है, जहां 6 और 7 अप्रैल को जनसुनवाई आयोजित की जानी है। लेकिन इस जनसुनवाई से पहले ही ग्रामीणों और खासकर युवाओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
पहले से परेशान, अब और बढ़ेगी मुश्किल
ग्रामीणों का साफ कहना है कि आर्यन मिनरल के मौजूदा संचालन से ही गांव में धूल, डस्ट और प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ चुका है कि खेती और सामान्य जीवन प्रभावित हो चुका है।
कृषि भूमि पर असर, स्कूल और छात्रावास के बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा ये सब पहले से ही बड़ी चिंता का विषय हैं।
अब जब क्रेशर विस्तार की बात सामने आई है, तो लोगों को डर है कि यह समस्या कई गुना बढ़ जाएगी।
युवाओं ने संभाला मोर्चा
ग्राम बोंदा में युवाओं का एक बड़ा समूह इस विस्तार के खिलाफ खुलकर सामने आया है।
मुकेश डनसेना, रामलाल पटेल, राम सिदार, कमलेश डनसेना, भवानी डनसेना, रवि सिदार, सुरेश चौहान, गोविंद निषाद, गोकुल पटेल, संतोष डनसेना, हेमलाल पटेल, नितिन पाणीग्राही, मोहन निषाद, रामचरण निषाद और हरि निषाद
जैसे युवा इस मुद्दे को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।
इनका कहना है कि “पहले ही जीना मुश्किल है, अब विस्तार हुआ तो हालात असहनीय हो जाएंगे।”
सरपंच पर उठे गंभीर सवाल
ग्रामीणों ने पंचायत सरपंच पर गुमराह करने का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि सरपंच को एक महीने पहले से जनसुनवाई की जानकारी थी, लेकिन गांव वालों को समय पर सूचना नहीं दी गई।
बताया जा रहा है कि 4 अप्रैल को एक छोटी सी मुनादी कर 6 और 7 अप्रैल की जनसुनवाई की जानकारी दी गई, जिससे अधिकतर ग्रामीण इस प्रक्रिया से अनजान रह गए।
EIA रिपोर्ट की जानकारी नहीं
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि उन्हें EIA (Environmental Impact Assessment) रिपोर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
जब तक लोगों को यह नहीं बताया जाएगा कि इस परियोजना से क्या फायदे और नुकसान होंगे, तब तक जनसुनवाई का कोई मतलब नहीं रह जाता।
नियमों पर सवाल, प्रशासन कटघरे में
अब इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसे जल्दबाजी में पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
“जनसुनवाई या औपचारिकता?”
ग्राम बोंदा में होने वाली इस जनसुनवाई को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है….
क्या यह वास्तव में ग्रामीणों की राय जानने के लिए है, या फिर सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया?
ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास नहीं चाहिए जो उनके जीवन और भविष्य को खतरे में डाल दे।