सारंगढ़।जिले में रेत और पत्थर के अवैध खनन व परिवहन को लेकर कलेक्टर संजय कन्नौजे अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। हालिया समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध खनन, रेत और गिट्टी के गैरकानूनी परिवहन पर कठोर और तत्काल कार्रवाई की जाए। कलेक्टर के तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि अब सिर्फ कागजी समीक्षा नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए।
लेकिन सवाल यहीं से खड़े होते हैं।
दो महीने से सूचना, फिर भी खामोशी क्यों?
गुडेली और कटंगपाली क्षेत्र में बीते करीब दो महीनों से अवैध खनन जैसी गंभीर गतिविधियों की जानकारी डमरुआ की टीम लगातार समाचारों और मौखिक शिकायतों के माध्यम से खनिज विभाग तक पहुंचाती रही।
इसके बावजूद न तो तत्कालीन खनि अधिकारी बजरंग पैकरा की ओर से कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिली और न ही प्रभारी खनि निरीक्षक दीपक पटेल ने संज्ञान लेना जरूरी समझा।
हालात यहां तक पहुंचे कि डमरुआ के प्रतिनिधि का कहना है—
सूचना देने के बाद फोन उठना तक बंद कर दिया गया।
यह लापरवाही है या फिर सिस्टम के भीतर जमी निष्क्रियता?
अगर अधिकारी शिकायतों से बचते रहें, तो फिर शासन को हो रही राजस्व हानि को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।
विभाग में वापसी और नई एंट्री, बदलेगा समीकरण?
इसी बीच खनिज विभाग में अनुराग नंद की वापसी की खबर सामने आई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस पद पर रहेंगे, लेकिन विभागीय गलियारों में चर्चा है कि यदि उन्हें स्वतंत्र प्रभार मिला, तो अवैध खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
वहीं दूसरी ओर, नए खनि निरीक्षक विवेक कुमार चंद्राकर के ज्वाइन करना अहम हो सकता है। युवा और नई नियुक्ति होने के कारण उनसे काफी उम्मीदें जुड़ी हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि विवेक चंद्राकर पर फिलहाल भरोसा किया जा सकता है और उनका रुख भी सख्त कार्रवाई वाला हो सकता है।
अब फैसला वक्त करेगा
कलेक्टर संजय कन्नौजे के निर्देश यह दिखाते हैं कि जिला प्रशासन अवैध खनन को लेकर संवेदनशील और गंभीर है।
अब असली परीक्षा खनिज विभाग की है—
क्या यह निर्देश सिर्फ बैठक की फाइलों तक सीमित रहेंगे?
या फिर गुडेली-कटंगपाली में पनपे खनिज माफियाओं के साम्राज्य पर सच में हथौड़ा चलेगा?
जवाब आने वाला वक्त देगा।
लेकिन इतना तय है—अब निगाहें सिर्फ माफियाओं पर नहीं, कार्रवाई करने वाले अफसरों की भूमिका पर भी टिकी हैं।