Damrua

जिला जेल में 800 से अधिक निरुद्ध बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण, न्यायिक संवेदनशीलता का उदाहरण बना हेल्थ कैंप

सिविल विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शासकीय और निजी चिकित्सकों की सहभागिता, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा जेल में होना जीवन के अधिकार समाप्त होने का कारण नहीं

डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़.  जिला जेल में निरोध बंदियों के स्वास्थ्य अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सिविल विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विशाल स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में 800 से अधिक कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार जैन तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा यति मिश्रा की उपस्थिति रही। शासकीय एवं निजी अस्पतालों से आए चिकित्सकों की टीम में डॉ. श्वेता कुलदीप, डॉ. प्रकाश चेतवानी सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल रहे।
स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान कैदियों की सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ मौसमी बीमारियों, त्वचा रोग, आंख एवं दंत रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी समस्याओं की पहचान की गई। आवश्यकतानुसार दवाइयां वितरित की गईं और जिन बंदियों में गंभीर या दीर्घकालिक बीमारी के लक्षण पाए गए, उन्हें आगे बेहतर उपचार के लिए परामर्श दिया गया। जेल प्रशासन और चिकित्सा विभाग के समन्वय से शिविर को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया।

IMG 20260204 WA0033
IMG 20260204 WA0032
IMG 20260204 WA0038
IMG 20260204 WA0041

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार जैन ने कहा कि मौसम में हो रहे बदलाव का प्रभाव सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है और जेल में निरुद्ध व्यक्तियों के लिए यह प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। किसी व्यक्ति का जेल में आ जाना यह नहीं दर्शाता कि वह अपने जीवन और स्वास्थ्य के मूल अधिकारों से वंचित हो जाए। न्यायिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि निरोध में रह रहे व्यक्ति बेहतर जीवन जीने के बारे में सोच सकें और आत्ममंथन कर स्वयं को सुधारने की दिशा में आगे बढ़ें। यह शिविर न्यायपालिका, प्रशासन और चिकित्सा तंत्र के संयुक्त प्रयास का उदाहरण बना, जिसने यह स्पष्ट किया कि जेल के भीतर भी मानवीय दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की जा सकती है।

सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सकों ने निभाई अपनी भूमिका

IMG 20260204 WA0042

जिला जेल में आयोजित स्वास्थ्य शिविर के दौरान 800 से अधिक निरुद्ध बंदियों की समग्र स्वास्थ्य जांच की गई। मौसमी बीमारियों के साथ-साथ आंख, दांत, त्वचा, रक्तचाप और मधुमेह जैसी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया गया। चिकित्सकों ने मौके पर ही आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराईं और बंदियों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए नियमित जांच और सावधानी बरतने की सलाह दी।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर सभी का हक चाहे वह बंदी हो या आम नागरिक

न्यायिक अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि जेल सजा का स्थान अवश्य है, लेकिन यह मानव गरिमा और जीवन के अधिकारों को समाप्त करने की व्यवस्था नहीं है। निरोध बंदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और उन्हें सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करना सुधारात्मक न्याय प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा है, ताकि वे भविष्य में एक बेहतर और जिम्मेदार जीवन की ओर लौट सकें।

Facebook
WhatsApp
Twitter
Telegram