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गुडेली में खनन जारी, पर खनिज विभाग कह रहा ‘निरंक’ फिर रॉयल्टी टीपी किस आधार पर?

सारंगढ़–बिलाईगढ़।
ग्राम गुडेली में खनन को लेकर खनिज विभाग के लिखित जवाब और जमीनी हकीकत के बीच गहरा विरोधाभास सामने आया है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जवाब में खनिज विभाग द्वारा यह कहा गया है कि ग्राम गुडेली में स्वीकृत खनन पट्टा / माइनिंग लीज से संबंधित जानकारी निरंक है, जबकि क्षेत्र में आज भी बृहद स्तर पर खनन गतिविधियाँ जारी होने की बात सामने आ रही है।

RTI के लिखित उत्तर में खनिज विभाग द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि आवेदन में “ग्राम गुडेली में संचालित समस्त खनिज खदानों से संबंधित स्वीकृत खनन पट्टा / माइनिंग लीज का विवरण” माँगा गया था, लेकिन उसके बावजूद जानकारी को “निरंक” बताया गया। यह उत्तर अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

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गुडेली में अवैध खनन



खनन चल रहा है, पर लीज निरंक यह कैसे संभव?

यदि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम गुडेली में कोई भी खनन पट्टा या माइनिंग लीज स्वीकृत नहीं है, तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि वहाँ संचालित खनन किस वैधानिक आधार पर हो रहा है। स्थानीय स्तर पर खनन गतिविधियों की निरंतरता और भारी वाहनों का आवागमन इस बात की ओर संकेत करता है कि खनन कार्य व्यवहार में बंद नहीं है।

रॉयल्टी टीपी जारी होने पर भी सवाल

सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि जब RTI के अनुसार स्वीकृत खनन पट्टा/लीज की जानकारी निरंक है, तो खनिज परिवहन हेतु रॉयल्टी टीपी (Transit Pass) किस आधार पर जारी की जा रही है।
कानूनन, रॉयल्टी टीपी केवल वैध खनन पट्टा/लीज के आधार पर ही जारी की जाती है। ऐसे में या तो विभागीय रिकॉर्ड अपूर्ण है, या फिर प्रक्रियागत गंभीर चूक हो रही है।

कार्रवाई का अभाव भी सवालों के घेरे में

यदि यह मान लिया जाए कि ग्राम गुडेली में खनन बिना वैध स्वीकृति के संचालित हो रहा है, तो अवैध खनन के विरुद्ध अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह भी एक अहम प्रश्न है। खनिज नियमों के तहत अवैध खनन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई, खनन बंदी, जुर्माना एवं दंडात्मक प्रावधान लागू होने चाहिए।

खनिज विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

खनिज विभाग, जिसके स्थानीय प्रभारी अधिकारी के रूप में खनिज अधिकारी बजरंग पैकरा पदस्थ हैं, उनके कार्यक्षेत्र में आने वाले ग्राम गुडेली में इस तरह का विरोधाभास सामने आना विभागीय निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है। RTI का उद्देश्य पारदर्शिता है, लेकिन जब लिखित उत्तर और जमीनी स्थिति में अंतर दिखाई दे, तो जवाबदेही तय होना आवश्यक हो जाता है।

अब निगाहें प्रशासन पर

RTI से उजागर इस विरोधाभास के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन और उच्च स्तर के अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे:-

* RTI में दी गई जानकारी की वस्तुस्थिति की जांच कराएँगे या नहीं,
* ग्राम गुडेली में संचालित खनन की वैधता की समीक्षा करेंगे या नहीं,
* और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संचालकों पर कार्रवाई करेंगे या नहीं।

फिलहाल RTI के इस जवाब ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गुडेली में खनन को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, और यही अस्पष्टता सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने खड़ी है।

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