Damrua

Overload Game: खनिज चौकी पर दिखावटी बवाल, पर कार्रवाई जीरो!

 

टीमरलगा (विशेष रिपोर्ट):

डमरुआ डेस्क ।।जिले की टीमरलगा खनिज जांच चौकी से ओवरलोड और बिना रॉयल्टी की खनिज लदी भारी वाहनों का गुजरना अब आम बात हो चुकी है। विगत दिन को जब जिला पंचायत सदस्य हरिहर जयसवाल ने इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ चौकी पर जमकर बवाल काटा, तो उम्मीद जगी कि शायद इस बार कुछ बड़ा होगा। लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात!

 

खनिज विभाग की ‘साइलेंट मोड’

जयसवाल के हंगामे के बावजूद खनिज विभाग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी—न कोई जांच, न कोई कार्रवाई। यह साफ इशारा करता है कि इस विभाग के अफसरों के लिए यह कोई नई बात नहीं है। विभाग में बैठे जिम्मेदार अफसरों को मानो ओवरलोड वाहनों का गुजरना रोज की रूटीन लगती है।

 

पत्रकार होता तो अब तक ‘अपराधी’ बन चुका होता!

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी पत्रकार ने गाड़ियाँ रोककर यही जानकारी उजागर की होती, तो क्या होता? जवाब साफ है—उस पर धमकाने, अवैध वसूली और अन्य गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर दिया जाता। लेकिन हरिहर जयसवाल का पद ऐसा है कि न केवल कोई अपराध दर्ज नहीं हुआ, बल्कि अंदरखाने ‘सेटिंग-वेटिंग’ की चर्चाएं भी चल पड़ी हैं।

 

पद’ का कवच, ‘सत्य’ का गला घोंटा जा रहा है!

जिस मुद्दे पर सत्ताधारी नेता को छूट मिल जाती है, वही मुद्दा आम नागरिक या पत्रकार के लिए कानूनी जाल बन जाता है। यह दोहरा मापदंड जनता के बीच गहरी नाराजगी और अविश्वास पैदा कर रहा है।

 

जनता का सवाल—यह सिस्टम है या साजिश?

स्थानीय नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या नियम-कानून सिर्फ कमजोरों के लिए हैं? ओवरलोडिंग और रॉयल्टी चोरी पर कार्रवाई की बजाय उसे नजरअंदाज करना आखिर किसके इशारे पर हो रहा है? यदि यही रवैया बना रहा, तो यह मामला न सिर्फ अवैध खनन, बल्कि लोकतंत्र की साख पर भी सवाल बनकर खड़ा रहेगा।

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