जमे कर्मचारी, जमी व्यवस्था क्या जिले में “सेटिंग” का राज चल रहा है?
सारंगढ़-बिलाईगढ़।जिले के अधिकांश सरकारी विभागों में एक अजीब तस्वीर देखने को मिल रही है। कई कर्मचारी वर्षों , कुछ मामलों में तो लगभग एक दशक से एक ही कुर्सी पर जमे हुए हैं। सामान्य प्रशासनिक नियम के अनुसार जिन पदों पर तीन से पांच साल में तबादला होना चाहिए, वहां न तो कोई स्थानांतरण सूची निकली है और न ही विभागीय स्तर पर इस पर कोई गंभीरता दिखाई दे रही है। नतीजा यह है कि जिले में प्रशासनिक जड़ता की स्थिति बनती जा रही है, जिस पर अब आम नागरिकों से लेकर जागरूक तबके तक में चर्चा तेज हो गई है।

लंबे समय से एक ही जगह टिके रहना आखिर वजह क्या?
सूत्रों और स्थानीय स्तर पर हो रही चर्चाओं की मानें तो एक ही पद पर लंबे समय तक बने रहने के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं:
स्थानीय पकड़ और प्रभाव – वर्षों की पोस्टिंग से कर्मचारी का स्थानीय राजनीतिक व प्रशासनिक तंत्र में गहरा नेटवर्क बन जाता है, जिसका उपयोग तबादले टलवाने में किया जाता प्रतीत होता है।
तबादला नीति पर ढिलाई – जिला स्तर पर स्थानांतरण के लिए न तो कोई तय समय-सीमा का पालन हो रहा है, न ही वरिष्ठ स्तर से इसकी सख्ती से समीक्षा।
व्यक्तिगत हित और सुविधा – परिवार, संपत्ति, स्थानीय व्यवसायिक जुड़ाव जैसे निजी कारण भी एक जगह टिके रहने की वजह बनते हैं।
जवाबदेही की कमी – जब तबादले न होने पर कोई सवाल ही नहीं पूछा जाता, तो यह स्थायी व्यवस्था जैसी बन जाती है।
किन विभागों में स्थिति सबसे ज्यादा चर्चा में?
जिले के राजस्व, पंचायत, शिक्षा, स्वास्थ्य, सहकारिता जैसे विभागों के साथ-साथ अब पुलिस विभाग में भी लंबे समय से जमे कर्मचारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। थानों और चौकियों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि इससे निष्पक्ष कार्रवाई और आम जनता के भरोसे पर असर पड़ सकता है। पुलिस जैसे संवेदनशील विभाग में लंबी पोस्टिंग को लेकर आमतौर पर सख्त तबादला नीति अपनाई जाती है, बावजूद इसके जिले में यह प्रक्रिया सुस्त नजर आ रही है।
क्या यह सही है? प्रशासनिक दृष्टि से समझें
प्रशासनिक व्यवस्था में तबादला केवल एक नियमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण औज़ार माना जाता है। जब कोई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहता है, तो इसके कई तरह के दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं:-
भ्रष्टाचार और अनियमितता की आशंका बढ़ना
लंबे समय की पोस्टिंग में स्थानीय ठेकेदारों, बिचौलियों और प्रभावशाली लोगों के साथ “सेटिंग” बन जाने का खतरा रहता है, जिससे पारदर्शी कामकाज प्रभावित हो सकता है।
आम जनता की शिकायतें अनसुनी रहना
एक ही कर्मचारी के लंबे कार्यकाल में जनता की पुरानी शिकायतें, लंबित फाइलें और अधूरे कार्य भी वैसे ही बने रहने की प्रवृत्ति देखी जाती है, क्योंकि जवाबदेही तय करने वाला कोई नया दृष्टिकोण नहीं आता।
नवाचार और नई ऊर्जा की कमी
नए कर्मचारी नई सोच, नई कार्यशैली और नए सुधार लेकर आते हैं। एक ही व्यक्ति के लंबे समय तक बने रहने से विभागीय कामकाज में ठहराव आ सकता है।
स्थानीय दबाव समूहों का प्रभाव बढ़ना
लंबी पोस्टिंग से कर्मचारी स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक दबाव समूहों के प्रभाव में आ सकते हैं, जिससे निष्पक्ष कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है खासकर पुलिस जैसे विभाग में यह जोखिम और गंभीर माना जाता है।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है बार-बार तबादले से भी प्रशासनिक निरंतरता प्रभावित होती है और किसी योजना या कार्य को पूरा करने में परेशानी आती है। इसलिए संतुलन जरूरी है: न बहुत जल्दी तबादला, न वर्षों तक एक ही जगह जमे रहना।
जिले की जनता में क्या भावना है?
स्थानीय स्तर पर लोगों का मानना है कि जिन विभागों में जनता का सीधा सरोकार है राजस्व, पंचायत, शिक्षा, स्वास्थ्य, सहकारिता और पुलिस वहां लंबे समय से जमे कर्मचारियों को लेकर शिकायतें आम हैं। लोगों का कहना है कि नई पोस्टिंग से जहां कामकाज में पारदर्शिता आने की उम्मीद बनती है, वहीं मौजूदा स्थिति से यह भरोसा कमजोर पड़ रहा है कि व्यवस्था निष्पक्ष रूप से चल रही है।
आगे क्या होना चाहिए?
🛑सभी विभागों में लंबित तबादला-योग्य पदों की सूची सार्वजनिक रूप से तैयार कर समीक्षा हो।
🛑तय समयावधि (आमतौर पर 3 वर्ष) पूरी कर चुके कर्मचारियों के स्थानांतरण की नियमित प्रक्रिया अपनाई जाए।
🛑संवेदनशील और जनता से सीधे जुड़े पदों पर प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा हो।
🛑तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए स्पष्ट मापदंड और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।






