Damrua

कुदरी में जीवामृत निर्माण कार्यशाला सम्पन्न, किसानों ने लिया जैविक खेती अपनाने का संकल्प

कुदरी में जीवामृत निर्माण कार्यशाला सम्पन्न, किसानों ने लिया जैविक खेती अपनाने का संकल्प

‘स्वस्थ जीवन, स्वस्थ धरती’ का संदेश: —सिक्किम की तरह जैविक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही

Screenshot 2026 07 28 19 41 06 96 6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7

जिले के ग्राम पंचायत कुदरी अंतर्गत पंडरीखार में मंगलवार को “स्वस्थ जीवन, स्वस्थ धरती” थीम पर जीवामृत (जैविक खाद) निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पत्रकार एवं प्रगतिशील कृषक अखिलेश नामदेव के खेत में किया गया, जहां किसानों को जीवामृत तैयार करने की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन कर जैविक खेती के लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यशाला में ग्राम पंचायत कुदरी सहित आसपास के गांवों के दर्जनों किसान शामिल हुए और भविष्य में जैविक खेती अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

Screenshot 2026 07 28 19 41 28 67 6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बृजलाल सिंह राठौर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया जैविक कृषि की ओर बढ़ रही है। उन्होंने सिक्किम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जैविक खेती को अपनाने के बाद किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि सिक्किम में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय लगभग ₹8 लाख है, जबकि गुजरात जैसे औद्योगिक रूप से विकसित राज्य में यह लगभग ₹3 लाख है। उन्होंने कहा कि यदि सिक्किम जैविक खेती के माध्यम से अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है तो छत्तीसगढ़ के किसान भी इस दिशा में आगे बढ़कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यशाला के दौरान किसानों को गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ और खेत की मिट्टी से जीवामृत तैयार करने की विधि का प्रदर्शन किया गया। बताया गया कि यह जैविक खाद न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में भी सकारात्मक वृद्धि करती है।

कार्यक्रम में उपस्थित कृषक रामदास राठौर ने कहा कि उन्हें पहली बार यह जानकारी मिली कि गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी से इतनी प्रभावी जैविक खाद तैयार की जा सकती है। उन्होंने संकल्प लेते हुए कहा कि अब वे अपनी खेती में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जीवामृत का उपयोग करेंगे और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

वहीं कृषक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरक क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। रासायनिक खादों के लगातार उपयोग से जहां मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं जीवामृत जैसी प्राकृतिक खाद भूमि को जीवंत बनाए रखती है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी उपजाऊ कृषि भूमि सुरक्षित करती है। कार्यक्रम में किसी विस्तार अधिकारी हेमंत कश्यप भी उपस्थित थे उन्होंने किसानों को विधिवत जीवामृत बनाने का तरीका बताया और उसके छिड़काव का भी तरीका बताया उन्होंने बताया कि कैसे इस जीवामृत के उपयोग से हम अपने फसल को अधिक और गुणवत्तापूर्ण उगा सकते हैं

कार्यक्रम के आयोजक एवं पत्रकार तथा प्रगतिशील कृषक अखिलेश नामदेव ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में जैविक पद्धति से विष्णुभोग धान की खेती की है, जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन एवं मुख्य अतिथि बृजलाल सिंह राठौर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में लगभग 20 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर जैविक खेती की जा रही है। यदि किसानों को इसी प्रकार प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में यह जिला पूर्णतः जैविक खेती की दिशा में एक नई पहचान स्थापित करेगा।

Facebook
WhatsApp
Twitter
Telegram
[metaslider id="1064"]