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वक्फ बोर्ड की संपत्तियों और आय-व्यय पर उठे सवाल: गौरेला-पेंड्रारोड जामा मस्जिद मामले में आरटीआई से मांगी गई जानकारी

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों और आय-व्यय पर उठे सवाल: गौरेला-पेंड्रारोड जामा मस्जिद मामले में आरटीआई से मांगी गई जानकारी

 

गौरेला-पेंड्रारोड-मरवाही (GPM): छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अधीन आने वाली अंजुमन इस्लामिया जामा मस्जिद, पेंड्रारोड (गौरेला) की संपत्तियों के आबंटन और वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।

 

गौरेला के वार्ड क्रमांक 03, मंगली बाजार निवासी मोहम्मद सफीक खान ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के तहत तीन अलग-अलग आवेदन लगाकर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड से मस्जिद व कब्रिस्तान की दर्जनों संपत्तियों के किराये, नीलामी और पिछले छह वर्षों के आय-व्यय का पूरा ब्यौरा मांगा है।

 

दुकानों, मकानों और हॉल की नीलामी पर मांगे गए दस्तावेज

आवेदक मोहम्मद सफीक खान ने 30 जून 2026 को जन सूचना अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड (रायपुर) को भेजे गए अपने आवेदनों में मस्जिद परिसर और कब्रिस्तान में स्थित व्यावसायिक व आवासीय संपत्तियों की विस्तृत जानकारी मांगी है।

 

आवेदनों में मुख्य रूप से निम्नलिखित संपत्तियों का जिक्र किया गया है:

मस्जिद परिसर में स्थित 18 दुकाने। दुकानों के पीछे स्थित 06 मकान और दुकानों के ऊपर स्थित 10 मकान। जामा मस्जिद में स्थित एक हॉल। जामा मस्जिद कब्रिस्तान में स्थित 07 पक्की और 03 कच्ची दुकानें।

 

इन सभी संपत्तियों को लेकर आवेदक ने वक्फ बोर्ड से यह जानकारी मांगी है कि इन दुकानों और मकानों की नीलामी किस दिनांक को की गई थी।

 

साथ ही, नीलामी से संबंधित सभी दस्तावेज, वर्तमान किरायेदारों के साथ हुए अनुबंध (एग्रीमेंट) की छायाप्रति और इन संपत्तियों से प्रतिमाह मिलने वाले किराये की स्पष्ट जानकारी मांगी गई है।

 

छह वर्षों के वित्तीय लेन-देन का भी मांगा गया हिसाब

संपत्तियों के किराये के अलावा, एक अन्य आवेदन में अंजुमन इस्लामिया जामा मस्जिद, पेंड्रारोड के संपूर्ण वित्तीय प्रबंधन की जानकारी मांगी गई है। आरटीआई के जरिए वित्तीय वर्ष 2020-21 से लेकर 2025-26 तक (कुल 6 वर्ष) की आय और व्यय (Income and Expenditure) का वर्षवार पूरा लेखा-जोखा वक्फ बोर्ड से तलब किया गया है।

 

पारदर्शिता की उम्मीद

आवेदक द्वारा विधिवत पोस्टल ऑर्डर संलग्न कर ये तीनों आवेदन रायपुर स्थित राज्य वक्फ बोर्ड कार्यालय को भेजे गए हैं। स्थानीय स्तर पर इस आरटीआई को वक्फ संपत्तियों के रखरखाव, आबंटन प्रक्रिया और किराये से होने वाली लाखों रुपये की आय के उपयोग में पारदर्शिता लाने के एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह है कि वक्फ बोर्ड तय समय सीमा के भीतर इन संपत्तियों और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करता है या नहीं।

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