सीडीबीई द्वारा नियम विपरीत बदले की भावना से किए गए बर्खास्तगी को माननीय उच्च न्यालय ने किया रद्द
गौरतलब है कि विगत दिनों छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन सीडीबीई के स्वयंभु पदाधिकारियों द्वारा बदले की भावना से नियम विपरित शासकीय अनुदान प्राप्त शाला मिशन स्कूल पेण्ड्रारोड की प्रभारी प्राचार्या भावना आर्थर को सीघे सीधे बर्खास्त कर दिया था। माननीय उच्च न्यालय ने भावना को न्याय दिलाया, न्यालय ने माना कि आरोप गलत तरीके से लगाए गए थे, अंततः आखिर सत्य की हुई जीत, समिति को उच्च न्यालय ने नसीहत दी कि कानून के दायरे में रहकर कार्य करें। हालांकि समिति में वर्तमान में स्थगन है।

बदला लेने के लिए नियमो को ताक में रख कर स्वयंभु समिति ने फर्जी आदेश जारी किए, जबकि समिति पर स्थगन आदेश है
चुकी शाला शासकीय अनुदान प्राप्त शाला है, जहाँ नियुक्ति/स्थनन्तरण/निलंबन/बर्खास्तगी में राज्य शासन के नियम लागू होते है, जबकि सीडीबीई की अनाधिकृत समिति जिसके निर्वाचन का मामला अभी भी माननीय उच्च न्यालय में लंबित है, व पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाए छत्तीसगढ़ द्वारा धारा -27 जारी नही होने के बाद भी अवैध रूप से शालाओ का मनमाने तरीके से संचालन कर रहे थे व न सिर्फ भावना आर्थर ही नही परन्तु 41 अन्य शालाओ के शिक्षक, प्राचार्य यहा तक कि चतुर्थ श्रेणी के आया दीदी को भी निर्ममतापूर्वक सेवा से बर्खास्त कर दिया। यह जानना भी जरूरी है कि सीडीबीई समिति पर उपसचिव छत्तीसगढ़ शासन ने शशि वाघे एवं अतुल आर्थर के पक्ष में स्थगन आदेश दिया है। उच्च न्यालय में जब तक निर्वाचन से संबंधित याचिका का निराकरण नही होता सुषमा कुमार, जयदीप रॉबिन्सन व नितिन लॉरेन्स की समिति को शालाओ के किसी भी कर्मचारी पर कार्यवाही करने का अधिकार नही है।
डायोसिस की बिशप सुषमा, महिला होकर भी महिला कर्मचारियों के साथ अन्याय क्यो कर रही?
प्राप्त जानकारी के अनुसार सर्वसमाज नगर के लिए बेहद आश्चर्य व चर्चा का विषय है कि सीडीबीई की समिति व डायोसिस की महिला बिशप कैसे शालाओ के योग्य और काबिल संस्था प्रमुख व कर्मचारियों को हटाने और अपने मनपसंद व्यक्ति को कुर्सी देने के लिए फर्जी जांच समिति बना कर कार्यवाही करती है। यह बिशप सुषमा कुमार को क्यो समझ नही आ रहा कि ऐसा करके अपनी ही संस्था का अहित कर रही है। पेण्ड्रा स्कूल की योग्य, काबिल, अनुभवी और परिश्रमी प्राचार्य भावना को फर्जी तरीके से बर्खास्त करने का आदेश तो करती है परन्तु उसी स्कूल के पुरुष शिक्षक जिस पर छेड़छाड़ व लैंगिक प्रताड़ना का आरोप है, उसे बर्खास्त तो छोड़िए निलंबित भी नही करती है, आखिर क्यों?? रायपुर में बैठकर पेण्ड्रा की शाला का गौरव समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। बहरहाल भावना आर्थर के संदर्भ में माननीय न्यालय के आदेश से जिला जीपीएम, नगर व शाला के विकास समिति, कर्मचारियों व विद्यार्थियों में हर्ष का माहौल है।





