रोजाना खुलासों ने रायगढ़ की कानून व्यवस्था पर खड़े किए तीखे सवाल, कार्रवाई दिखावा या जड़ों पर प्रहार
डमरूआ न्यूज़ / रायगढ़. रायगढ़ में नए पुलिस कप्तान के पदभार संभालते ही जिस तरह से अवैध गतिविधियों के खुलासे हो रहे हैं, उसने पूरे शहर को चौंका दिया है। सट्टा, कबाड़, देह व्यापार जैसी सामाजिक बुराइयों पर रोजाना हो रही पुलिस कार्रवाई से ऐसा प्रतीत होने लगा है मानो पूरा शहर ही अवैध धंधों का अड्डा बन चुका हो। हालात यह हैं कि सुबह होते ही अखबारों की सुर्खियों में वही पंक्तियां खोजी जाती हैं कि आज किस मोहल्ले से पुलिस ने अवैध कारोबारियों को पकड़ा। इस स्थिति ने आम नागरिक के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ये गतिविधियां पुलिस कप्तान शशि मोहन के के रायगढ़ आने के बाद ही शुरू हुईं या फिर यह सब वर्षों से शहर की नसों में दौड़ रहा था, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा।
पुलिस की अचानक बढ़ी सक्रियता को लेकर शहर में अलग-अलग धारणाएं बन रही हैं। कुछ लोग इसे नए कप्तान की शुरुआती सख्ती और दबदबा बनाने की रणनीति मान रहे हैं, ताकि पुलिस का बाजार भाव दोबारा स्थापित किया जा सके। वहीं कई लोगों का मानना है कि यदि अपराधी इतने खुलेआम सक्रिय थे तो यह पुलिस तंत्र की पूर्व कमजोरी और मिलीभगत का प्रमाण है। यदि वास्तव में अवैध धंधे लंबे समय से संचालित हो रहे थे तो यह सवाल स्वाभाविक है कि किन थाना प्रभारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण में यह सब चलता रहा।
शहरवासियों का अनुभव यह भी रहा है कि पुलिस कप्तान आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं और फिर समय के साथ व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौट आती है। रायगढ़ ने ऐसे कई कप्तानों को देखा है जो ईमानदारी और सख्ती की कसमें खाते हुए आए, लेकिन उनकी कथित प्रतिबद्धता कुछ ही दिनों में सवालों के घेरे में आ गई। आज भी स्थिति अलग नहीं दिख रही। यदि कार्रवाई केवल दिखावटी रही और केवल छोटे अपराधियों तक सीमित रही तो यह पूरे अभियान की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देगी। शहर को भाषण नहीं, बल्कि स्थायी, निष्पक्ष और निर्भीक कार्रवाई चाहिए, जिसमें अपराधियों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वाले तंत्र पर भी प्रहार हो।
संरक्षण की परतें कब टूटेंगी
यदि अवैध गतिविधियां वर्षों से शहर में फल-फूल रही थीं तो यह तय है कि बिना पुलिस और प्रशासनिक संरक्षण के ऐसा संभव नहीं था। ऐसे में सवाल यह है कि क्या नए कप्तान केवल वर्तमान मामलों में गिरफ्तारी तक सीमित रहेंगे या फिर उन थाना प्रभारियों और वरिष्ठ अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई होगी, जिनके कार्यकाल में यह सब बेरोकटोक चलता रहा।
गुंडा टैक्स, गैंग वार और छूटभइये नेताओं के नेटवर्क क्रिकेट सट्टा पर कब होगा प्रहार
रायगढ़ शहर में गुंडा तत्वों, गैंग वार और बाहर से आने वाली गाड़ियों से अवैध गुंडा टैक्स वसूली की शिकायतें नई नहीं हैं। आरोप है कि इस अवैध उगाही में छूटभइये नेताओं की सक्रिय भूमिका रही है, जो खुद को ट्रांसपोर्टर संघ का संरक्षक और मार्गदर्शक बताकर खुलेआम दबंगई करते रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पुलिस इन रसूखदार तत्वों पर भी हाथ डालने का साहस दिखाएगी या फिर कार्रवाई केवल औपचारिक सट्टा-पट्टी और देह व्यापार तक सीमित रखकर, कुछ मामलों को उजागर कर अपना बाजार मूल्य बढ़ाने तक सिमट जाएगी। शहर यह जानना चाहता है कि कानून का डंडा सभी के लिए बराबर चलेगा या फिर एक बार फिर ताकतवर चेहरे सिस्टम से बच निकलेंगे।