ख़र्री क्षेत्र में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, वह किसी अनुमान या सूत्रों की जानकारी नहीं, बल्कि हमारी मौके पर की गई पड़ताल और प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग का नतीजा है। धनानिया और राजेश की जोड़ी यहां खनिज गतिविधियों में खुलकर धमाल मचा रही है।
टीम जब मौके पर पहुंची तो साफ तौर पर देखा गया कि क्षेत्र में खनिज का खनन जारी है, गिट्टी का प्रोडक्शन लगातार हो रहा है, और खनिज का परिवहन बेरोक-टोक जारी है। यही नहीं, खर्री के गौण खनिज क्षेत्र में हजारों टन पत्थर का टीला नुमा भंडारण किया जा चुका है, जो किसी भी सामान्य गतिविधि से कहीं अधिक है।
पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि प्रोडक्शन अपने चरम पर है। भारी मात्रा में निकाला गया पत्थर एकत्र कर रखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खनन सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीन पर पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि खर्री, जिला मुख्यालय सारंगढ़ से महज 5–6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद इतनी बड़ी खनिज गतिविधियां प्रशासन की जानकारी में नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
गुडेली और कटंगपाली में अवैध खनन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं, जहां ज़मीन पर हो रही गतिविधियां विभागीय और प्रशासनिक मौन पर खुद ही मुहर लगा रही हैं। लेकिन खर्री का मामला और भी गंभीर है, क्योंकि यहां न तो दूरी का बहाना है और न ही दुर्गमता का।
हमारी प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग यह दिखाती है कि खर्री में खनन, प्रोडक्शन, परिवहन और भंडारण चारों स्तर पर गतिविधियां एक साथ चल रही हैं। अब सवाल यह नहीं है कि क्या हो रहा है, सवाल यह है कि इतनी स्पष्ट और प्रत्यक्ष गतिविधियों के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?
अगर यह सब नियमों के तहत है, तो संबंधित अनुमति, माइनिंग प्लान, स्टॉक रजिस्टर और परिवहन दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए। और अगर ऐसा नहीं है, तो फिर जिम्मेदारी तय होना तय है।
ख़र्री में सामने आई यह सच्चाई अब प्रशासन और खनिज विभाग के लिए एक सीधी परीक्षा है कार्रवाई होगी या खामोशी जारी रहेगी?