रायगढ़-उड़ीसा बॉर्डर पर हुई हथियारबंद गैंगवार की असली वजह अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। इस पूरे विवाद की जड़ कोई अचानक हुआ टकराव नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही गुंडा टैक्स की अवैध वसूली है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ बॉर्डर क्षेत्र में संगठन की आड़ लेकर डंपर पार्टी से जुड़े कुछ गुंडा तत्व उड़ीसा से रायगढ़ आ रही कोल ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों से जबरन वसूली कर रहे थे। यह वसूली महीनों से चल रही थी, लेकिन उड़ीसा के ट्रांसपोर्टर्स ने व्यापार जारी रखने के लिए इसे मजबूरी में सहन किया एवं जब अवैध वसूली का विरोध हुआ तो विवाद हिंसा में बदल गया उड़ीसा का गैंग मौके पर भारी पड़ गया और वही गुंडा तत्व अब फरियादी बनकर सामने आ गए हैं। रायगढ़ ट्रांसपोर्टर संगठन को भी ऐसे गुंडा तत्वों को संरक्षण देने के बजाय उन पर लगाम कसने की जरूरत है, लेकिन इस धंधे में शायद बाहुबल को ही प्रमुख आधार माना जा रहा है जिसकी वजह से दो राज्यों के बीच गैगवार छिड़ गई है…
डमरूआ/रायगढ़।
रायगढ़-उड़ीसा बॉर्डर पर हुई हथियारबंद गैंगवार की असली वजह अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। इस पूरे विवाद की जड़ कोई अचानक हुआ टकराव नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही गुंडा टैक्स की अवैध वसूली है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ बॉर्डर क्षेत्र में संगठन की आड़ लेकर डंपर पार्टी से जुड़े कुछ गुंडा तत्व उड़ीसा से रायगढ़ आ रही कोल ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों से जबरन वसूली कर रहे थे। यह वसूली ₹400 प्रति वाहन बॉर्डर एंट्री करने पर महीनों से चल रही थी, लेकिन उड़ीसा के ट्रांसपोर्टर्स ने व्यापार जारी रखने के लिए इसे मजबूरी में सहन किया। जब अवैध वसूली का विरोध हुआ तो विवाद हिंसा में बदल गया और वही गुंडा तत्व अब फरियादी बनकर सामने आ गए हैं।
बताया जा रहा है कि जैसे ही उड़ीसा के ट्रांसपोर्टर्स ने गुंडा टैक्स देने से इनकार किया, रायगढ़ क्षेत्र के इन तथाकथित डंपर पार्टी सदस्यों ने जिनमें किसी यादव का नाम प्रमुखता से उभर कर सामने आ रहा है, ट्रांसपोर्टर के साथ मारपीट कर दी। इसके बाद मामला तेजी से फैला और देखते ही देखते बड़ी संख्या में उड़ीसा के ट्रांसपोर्टर्स मौके पर पहुंच गए। जवाबी कार्रवाई में गुंडा टैक्स वसूलने वाले तत्वों की पिटाई हुई। इस दौरान कुछ ऐसे लोग भी चोटिल हुए जो बीच बचाव में शामिल थे। शहर में यह चर्चा आम है कि अवैध वसूली का विरोध करने पर हमला करने वाले अब खुद को पीड़ित दिखाकर कानून की आड़ लेने की कोशिश कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने रायगढ़ के औद्योगिक परिवेश में एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ट्रांसपोर्ट और कोल व्यापार अब कानून से नहीं, बल्कि गुंडा टैक्स से संचालित हो रहा है। यदि अवैध वसूली को समय रहते नहीं रोका गया तो यह मॉडल पूरे जिले में फैल सकता है, जहां व्यापार की अनुमति पुलिस या प्रशासन से नहीं, बल्कि गैंग के इशारों पर तय होगी।
बॉर्डर पर गैंगवार, हथियारों का खुला प्रदर्शन
18 जनवरी 2026 की शाम लगभग 4.45 से 5.00 बजे इंडियन ऑयल मिश्रा पेट्रोल पंप के पीछे स्थित यूनियन कार्यालय में हथियारबंद भीड़ का हमला हुआ। आरोप है कि बंटी डालिया उर्फ घनश्याम, गोकुल गोयका, धीरेंद्र प्रधान, विपिन अग्रवाल, धनी मित्रो, तेजराम सहित 100 से 140 अज्ञात लोग रिवॉल्वर, पिस्टल, तलवार, लाठी, हॉकी डंडे और ज्वलनशील पदार्थों के साथ एकजुट होकर पहुंचे। कार्यालय में मौजूद लोगों को बाहर घसीटकर बेरहमी से पीटा गया। इस हमले में शंकर अग्रवाल, प्रमाशंकर साही, सुभाष पांडेय, संजय अग्रवाल और सतीश कुमार चौबे गंभीर रूप से घायल हुए। आरोप है कि हमलावरों ने चार टोकन और लगभग पंद्रह हजार रुपये नकद भी लूट लिए।
अवैध वसूली करने वालों पर FIR शून्य, कार्रवाई क्यों नहीं?
इस पूरे प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह है कि जिन गुंडा तत्वों पर लंबे समय से कोल ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों से अवैध वसूली करने के आरोप लग रहे हैं, उन पर अब तक कोई स्वतंत्र एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। जबकि कानून के अनुसार अवैध वसूली, धमकी और संगठित अपराध की शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए थी। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि गुंडा टैक्स की यह वसूली कोई एक-दो दिन की नहीं, बल्कि काफी समय से लगातार चल रही थी, जिसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर सभी को थी। सवाल यह है कि जब अवैध वसूली की वजह से ही विवाद भड़का, मारपीट हुई और गैंगवार जैसी स्थिति बनी, तो पुलिस ने उन वसूलीकर्ताओं को आरोपी बनाने की बजाय उन्हें पीड़ित के तौर पर क्यों स्वीकार कर लिया। यदि समय रहते इन गुंडा तत्वों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाती, तो न गैंगवार की नौबत आती और न ही रायगढ़ की कानून व्यवस्था पर इतने गंभीर सवाल खड़े होते। यह चुप्पी इस आशंका को और मजबूत कर रही है कि कहीं चुनिंदा लोगों को संरक्षण देकर पूरे मामले की दिशा जानबूझकर नहीं मोड़ी जा रही।
कानून का तकाजा है कि अवैध वसूली करने वालों पर बिना देर किए संगठित अपराध की धाराओं में प्रकरण दर्ज हो, ताकि यह संदेश जाए कि रायगढ़ में व्यापार गुंडा टैक्स से नहीं, कानून से चलेगा। लेकिन अब तक की कार्रवाई को देखकर यही कहा जा सकता है कि सवाल बहुत हैं, जवाब नदारद हैं।
ओड़िसा की ऒर से बंटी डालमिया बेखौफ, गिरफ्तारी शून्य
गैंगवार के बाद भी मुख्य आरोपी बंटी डालमिया उर्फ घनश्याम की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। ओडिशा-छत्तीसगढ़ बॉर्डर सील करने की कार्रवाई सिर्फ कागजी साबित हो रही है। गिरफ्तारी न होने के बीच आरोपी सोशल मीडिया पर बच्चे का जन्मदिन मनाते हुए वीडियो और फोटो साझा कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुलिस और प्रशासन के लिए खुली चुनौती है, जो यह दिखा रही है कि आरोपी को कानून का कोई डर नहीं।
पुलिस-प्रशासन से नजदीकियों की चर्चा
रायगढ़ में यह चर्चा तेज है कि बंटी डालमिया का पुलिस और प्रशासन के साथ लंबे समय से सहयोगात्मक व्यवहार का आदान-प्रदान रहा है। चक्रधर समारोह जैसे बड़े आयोजनों में बाहर से आए अतिथियों के लिए महंगी और लग्जरी गाड़ियों की व्यवस्था में उसकी भूमिका बताई जाती रही है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इन्हीं कथित एहसानों के कारण आज गिरफ्तारी में नरमी बरती जा रही है।
मिर्ची स्प्रे डालकर की गई कुटाई
बताया जा रहा है कि घटना के दौरान मिर्ची स्प्रे का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बंटी डालमिया अपने साथ मिर्ची स्प्रे लेकर गया था और विवाद के दौरान स्प्रे करते ही हालात बेकाबू हो गए। इसके बाद हथियार लहराए गए और गोलीबारी की नौबत आ गई। पूर्व की घटनाओं में भी ताबड़तोड़ फायरिंग हो चुकी है, जिससे यह साफ होता है कि यह कोई सामान्य झगड़ा नहीं बल्कि सुनियोजित गैंग गतिविधि है। किसने किसको कोटा यह ज्यादा पता नहीं जा सका क्योंकि मिर्ची स्प्रे से आंख बंद थी जो कुछ फुटेज सामने आए हैं उसके आधार पर अथवा अंदाज के आधार पर आरोपियों का आरोप तय किया जा रहा है.
वसूली गैंग के कारण औद्योगिक रायगढ़ में गैंग कल्चर का खतरा
कोल ट्रांसपोर्ट, ठेकेदारी और श्रमिक संगठनों के इर्द-गिर्द गैंग कल्चर तेजी से पनप रहा है। दबदबा और अवैध वसूली की लड़ाई अब हथियारों के दम पर लड़ी जा रही है। यदि गुंडा टैक्स और गैंगवार की इस प्रवृत्ति पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो रायगढ़ को औद्योगिक प्रदूषण के साथ-साथ अपराध और भय के प्रदूषण की भी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।