रायगढ़ में सार्वजनिक तालाब को मिट्टी से पाटने का गंभीर आरोप, पीड़ित की शिकायत पर भी कार्रवाई शून्य, अवैध खनन और दबंगई से दहशत
डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़. जिले में प्रशासनिक निगरानी और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए एक लिखित शिकायत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शिकायत में स्पष्ट रूप से गैर-आवेदकों के रूप में कृष्णा सिटी रायगढ़ द्वारा भागीदार अजय अग्रवाल पिता बजरंग लाल अग्रवाल, नवीन कुमार बंसल पिता सुरेश कुमार बंसल, श्रवण अग्रवाल पिता बजरंग अग्रवाल, अंकित बंसल पिता विनोद कुमार बंसल, धर्मप्रकाश डालमिया पिता रामकुमार डालमिया, रायगढ़ प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर रोहन बंसल पिता जय कुमार बंसल तथा रायगढ़ प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के डायरेक्टर अमित मित्तल पिता दशरथ मित्तल के नाम दर्ज हैं। शिकायतकर्ताओं के रूप में ललित मेहता, खुशवंत अग्रवाल और शिवराज यादव के नाम सामने आए हैं। शिकायत के अनुसार शहर स्थित एक सार्वजनिक तालाब में बिना किसी शासकीय अनुमति और बिना सक्षम प्राधिकरण की स्वीकृति के खुलेआम मिट्टी डंप की जा रही है। आरोप है कि यह कार्य निजी लाभ और दबंगई के बल पर किया जा रहा है, जिससे न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि पर्यावरण और जनहित पर भी सीधा प्रहार हो रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि तालाब का उपयोग वर्षों से स्थानीय नागरिक सार्वजनिक रूप से करते आ रहे हैं, बावजूद इसके प्रभावशाली लोगों द्वारा इसे मिट्टी से भरकर समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इसी अवैध कार्रवाई के दौरान शिकायतकर्ताओं के मकान की छत को भी नुकसान पहुंचाया गया, जिससे भारी आर्थिक और मानसिक क्षति हुई। शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचने के बावजूद आज तक किसी प्रकार की ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे अवैध गतिविधियों को खुला संरक्षण मिलने का संकेत मिल रहा है। प्रशासनिक चुप्पी ने आरोपियों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं और शहर में यह संदेश जा रहा है कि सार्वजनिक संपत्ति असुरक्षित है और कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
सार्वजनिक तालाब की चढ़ा दी गई बलि, गांधी जी का बंदर बना रहा प्रशासन
सार्वजनिक तालाब पर खुला हमला शिकायत में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि रायगढ़ स्थित सार्वजनिक तालाब, जिसका उपयोग आम नागरिक वर्षों से करते आ रहे हैं, उसे सुनियोजित तरीके से मिट्टी से पाटा जा रहा है। यह कार्य बिना किसी वैधानिक अनुमति, बिना पर्यावरणीय स्वीकृति और बिना प्रशासनिक आदेश के किया जा रहा है। तालाब को खत्म करने की यह कोशिश जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और भविष्य की जल जरूरतों के साथ सीधा खिलवाड़ मानी जा रही है।
घर की छत तोड़ी, पीड़ित पर दबाव
शिकायत के अनुसार अवैध मिट्टी डंपिंग के दौरान शिकायतकर्ता के मकान की छत को नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि यह नुकसान दुर्घटनावश नहीं बल्कि लापरवाही और दबाव बनाने की नीयत से किया गया। पीड़ित परिवार को भारी आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, लेकिन अब तक न तो नुकसान की भरपाई हुई और न ही दोषियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई शून्य
पीड़ित का कहना है कि इस पूरे मामले की सूचना संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप से दी जा चुकी है, इसके बावजूद आज दिनांक तक कोई प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई के अभाव में आरोपियों के हौसले बढ़े हैं और अवैध कार्य लगातार जारी है। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता और मिलीभगत की आशंका को और गहरा करती है, जिससे आम नागरिकों का सिस्टम पर भरोसा टूटता नजर आ रहा है।