सरहर धान खरीदी केंद्र : प्रशासनिक संरक्षण में चल रही मनमान
इतनी दूर से प्रभारी की तैनाती — क्या पहचान छुपाने और जवाबदेही से बचने की साजिश है?
बम्हनीडीह ब्लॉक का सरहर धान खरीदी केंद्र अब केवल अव्यवस्था का नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण में पनप रही अनियमितताओं का प्रतीक बनता जा रहा है। केंद्र पर जो कुछ हो रहा है, वह महज़ किसी एक कर्मचारी की मनमानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
किसानों के अनुसार, शासन द्वारा तय मानक 40.580 किलोग्राम के स्थान पर जबरन 41.500 किलोग्राम धान लिया जा रहा है। इससे भी अधिक गंभीर तथ्य यह है कि यदि बोरा 41.500 की जगह 41.200 किलोग्राम भी होता है, तब भी किसानों से अवैध वसूली की जा रही है। यह स्थिति बताती है कि धान खरीदी अब नियमों से नहीं, बल्कि डर और दबाव से संचालित हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है। जिले के एक सिरे स्थित खिशोरा सहकारी समिति से एक ऐसे कर्मचारी को, जिस पर पहले अनियमितताओं के आरोप रहे हैं और जो वर्षों तक नौकरी से पृथक रहा, जिले के दूसरे सिरे सरहर धान खरीदी केंद्र का प्रभारी बना दिया गया। वह भी तब, जब उसे कुछ महीने पहले ही पुनः जॉइनिंग दी गई है।
-
सवाल यह है कि इतने दूर से प्रभारी की तैनाती क्यों?
-
क्या यह जानबूझकर किया गया निर्णय है ताकि स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान न हो और शिकायतें दबाई जा सकें?
-
क्या यह प्रशासन की सोची-समझी रणनीति है, जिससे जिम्मेदारी तय ही न हो पाए?