सतनाम करता पुरख निरभउ निरवैर अकाल मूरत अजूनी सैभं गुर प्रसाद॥”
गुरुवाणी की रौशनी में निहाल हुआ चांपा — श्री अखंड पाठ साहिब का समापन, नए गुरुद्वारा भवन में गुरु महाराज जी का प्रकाश
चांपा।सिख धर्म का पवित्र पर्व प्रकाश उत्सव गुरु साहिबानों के अवतरण दिवस की स्मृति में श्रद्धा और सेवा भावना से मनाया जाता है। “प्रकाश” का अर्थ है — गुरु की ज्योति का प्रकट होना, अर्थात वह दिन जब गुरुवाणी का प्रकाश मानवता को मार्गदर्शन देने आया। इस अवसर पर संगतें सेवा, सिमरन और गुरुबाणी में लीन होकर वाहेगुरु जी की कृपा का आभार प्रकट करती हैं।
इसी पवित्र परंपरा के अंतर्गत पंजाबी समाज चांपा द्वारा आयोजित श्री अखंड पाठ साहिब का शुभारंभ 1 नवम्बर को अरदास के साथ हुआ था। इसका भोग 5 नवम्बर को नए निर्माणाधीन गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा भवन में होगा। इसी अवसर पर गुरु महाराज जी का प्रकाश भी किया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत दोपहर 12 बजे निशान साहिब का चोला परिवर्तन किया जाएगा। इसके उपरांत दोपहर 3 बजे सदर बाजार सिंधी पंचायत गुरुद्वारा से बरपाली गुरुद्वारा तक नगर कीर्तन निकलेगा, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी में पंज प्यारों की अगुवाई रहेगी।
संगतों की भारी उपस्थिति में नगर कीर्तन पूरे श्रद्धा और उत्साह से निकाला जाएगा। नगर कीर्तन का समापन नई बिल्डिंग स्थित गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा चांपा में होगा, जिसके पश्चात गुरु का अटूट लंगर सेवा भावना से वरताया जाएगा।
6 नवम्बर को सुबह 10:30 बजे गुरुद्वारा परिसर में बाहर से पधारे प्रसिद्ध रागी जत्था द्वारा शब्द-कीर्तन का विशेष कार्यक्रम रखा गया है, जिससे संगत निहाल होगी। इस अवसर पर भी गुरु का अटूट लंगर सेवा भावना के साथ वरताया जाएगा।
शाम 7:30 बजे से बच्चों का विशेष कार्यक्रम होगा, जिसमें बच्चे शब्द-कीर्तन और गुरबाणी पाठ प्रस्तुत करेंगे।
पंजाबी समाज चांपा द्वारा आयोजित यह भव्य धार्मिक आयोजन सेवा, श्रद्धा और संगत के संगम का प्रतीक बन गया है। पूरे नगर में गुरु घर के इस शुभ अवसर को लेकर उल्लास, भक्ति और गुरुवाणी के मधुर स्वरों का वातावरण व्याप्त है।
“गुरु की बाणी अमृत है, जो सुणै सो निहाल होवै”
इस अमर उपदेश के साथ चांपा की संगत नए गुरुद्वारे में प्रकाश उत्सव को ऐतिहासिक रूप देने की तैयारी में जुटी है।