नवगांव केस में ढीली कार्रवाई पर उठे सवाल, दलित संगठनों का दबाव रंग लाया। 11 अधिकारियों के फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा जितेन्द्र खुंटे की पोस्टिंग की
छत्तीसगढ़ में गुरुवार शाम गृह विभाग ने बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी कर 11 डीएसपी स्तर के अधिकारियों का तबादला कर दिया। इनमें सबसे चर्चित नाम जांजगीर-चांपा के डीएसपी जितेन्द्र कुमार खुंटे का है, जिन्हें दंतेवाड़ा भेजा गया है।उनके तबादले को सीधे तौर पर नवगांव केस से जोड़ा जा रहा है। दलित परिवार पर हमले और जातिसूचक गालियों के आरोपी सरपंच पति परमानंद राठौर को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया। जबकि 1 अगस्त को हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी भी खारिज कर दी थी।
क्या है मामला?
13 और 15 जून की रात, नवगांव (बलौदा ब्लॉक, जिला जांजगीर-चांपा) में सरपंच पति परमानंद राठौर ने 10–12 लोगों के साथ मिलकर एक दलित परिवार पर हमला किया।
महिलाओं और बच्चों को धमकियाँ दीं, जातिसूचक गालियाँ दीं और पूरे परिवार को सामाजिक रूप से अपमानित किया।
आरोपी ने ट्रैक्टर लगाकर गांव का मुख्य मार्ग भी 10 दिन तक जाम रखा।
एफआईआर और धाराएँ:
शिकायत 16 जून को दी गई, मगर एफआईआर 01 जुलाई को दर्ज हुई।
IPC की धाराएँ 296, 324, 351(2) और एससी/एसटी एक्ट की धाराएँ 3(1)(द), 3(1)(ध) जोड़ी गईं।
न्यायालय का रुख:
9 जुलाई को जिला अदालत ने अग्रिम जमानत खारिज की।
1 अगस्त को हाईकोर्ट ने भी जमानत याचिका ठुकरा दी।
इसके बावजूद पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं की। आरोपी को “फरार” बताने के बजाय अरनेश कुमार केस का हवाला देकर खुला छोड़ दिया गया। यही रवैया लोगों में भारी आक्रोश का कारण बना है।
भीम आर्मी, अंबेडकरवादी मोर्चा और अन्य दलित संगठनों ने साफ तौर पर आंदोलन की चेतावनी दी थी,
सवालों के घेरे में डीएसपी खुंटे
सामाजिक संगठनों ने मंत्री स्तर तक शिकायत पहुंचाई थी कि आरोपी को जानबूझकर बचाया जा रहा है। डीएसपी जितेन्द्र खुंटे पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस कार्रवाई को ढीला रखकर आरोपी को राहत दी।
अब लोगों के बीच यह चर्चा है कि आखिरकार अनुसूचित जाति वर्ग की आवाज सुनी गई और उसी दबाव में डीएसपी का तबादला कर दिया गया।
बड़ा पुलिस फेरबदल
गृह विभाग ने आदेश में कुल 11 डीएसपी का तबादला किया है। इनमें मनोज कुमार तिर्की को बीजापुर, मनीष कुमार कुवंर को सुकमा, सिद्धार्थ बघेल को बीजापुर, लितेश सिंह को गरियाबंद और हरीश कुमार पाटिल को बीजापुर भेजा गया है।
बस्तर रेंज में तैनाती बढ़ाकर सरकार ने नक्सल मोर्चे पर ध्यान केंद्रित किया है।
मगर जांजगीर-चांपा के नवगांव केस ने इस फेरबदल को अलग राजनीतिक और सामाजिक रंग दे दिया है।
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