सारंगढ़ डमरुआ: जिला मुख्यालय सारंगढ़ इन दिनों ‘गड्ढों का शहर’ बन चुका है। खासकर भारत माता चौक से रायगढ़ पहुंच मार्ग की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि वह अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का नहीं, बल्कि खतरे का कारण बन गई है। यह मार्ग मीडिया की सुर्खियों में छाया हुआ है, पर प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
बारिश में गड्ढे बने जानलेवा जाल
मानसून आने के बाद से लगातार बारिश की तीव्रता ने पहले से मौजूद गड्ढों को और भी विशाल और गहरा बना दिया है। अब ये गड्ढे सड़क पर इस तरह फैले हैं कि सड़क और तालाब में फर्क करना मुश्किल हो गया है। हर रोज़ राहगीर जान हथेली पर रखकर इन रास्तों से गुजरते हैं। बाइक और स्कूटी सवारों के लिए यह रास्ता मानो मौत का फंदा बन गया है, जहां ज़रा सी लापरवाही गंभीर दुर्घटना में तब्दील हो सकती है।
प्रशासन की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल
स्थानीय मीडिया और आम जनता लगातार इस मामले को उठा रही है। नगर पालिका से लेकर जिला प्रशासन तक को सूचित किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश न तो नगर पालिका चेती, और न ही कलेक्टर कार्यालय से कोई संज्ञान लिया गया।
जनता के सब्र का इम्तिहान
लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि जब चुनाव आते हैं तो वादों की बौछार होती है, लेकिन समस्या के समय हर जिम्मेदार ‘असहाय’ नज़र आता है। स्कूल जाते बच्चे, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी और बुज़ुर्ग—हर कोई इस बदहाल सड़क व्यवस्था का शिकार हो रहा है।
क्या कहती है जनता?
स्थानीय निवासियों ने कहा, “गड्ढे इतने गहरे हो गए हैं कि इसमें छोटी गाड़ी पूरी समा जाए। हमने कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
अब सवाल यह है कि आखिर प्रशासन क्या किसी बड़े हादसे के इंतजार में है?