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स्कूल बसों की फिटनेस जांच सराहनी, पर कौन से चार बिंदु जांच मे छोड़ दिए ?

  स्कूल बसों की फिटनेस जांच सराहनीय, पर सुरक्षा के 4 बिंदु क्यों छोड़े गए?

शासन के 16 बिंदुओं की जगह जांजगीर पुलिस ने केवल 12 बिंदुओं पर की जांच, बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़?

 जांजगीर-चाम्पा | 07 जून 2025

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले जिला पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा स्कूल बसों की फिटनेस और सुरक्षा जांच हेतु शिविर आयोजित करना निश्चित ही एक सकारात्मक और सराहनीय पहल है।

पुलिस लाइन, खोखरा भाठा में लगे इस विशेष शिविर में जिले की 72 स्कूल बसों और वैनों की रजिस्ट्रेशन, परमिट, बीमा, चालकों के लाइसेंस और स्वास्थ्य की जांच की गई।

लेकिन इस प्रशंसनीय प्रयास के बीच एक गंभीर सवाल भी खड़ा हो गया है।

 शासन के 16 में से सिर्फ 12 बिंदु क्यों?

छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन विभाग द्वारा 28 नवम्बर 2015 को जारी राजपत्र अधिसूचना (क्रमांक 5-14/आठ-परी/2016) के अनुसार स्कूल बसों की जांच के लिए 16 बिंदुओं को अनिवार्य किया गया है।

परंतु पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जांच सिर्फ 12 बिंदुओं पर की गई।

परन्तु उन 12 बिन्दुओ का उल्लेख भी नहीं किया गया है, 

अब सवाल उठता है की – 

 # क्या छत्तीसगढ़ सरकार के 16 बिंदु सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?

# आखिर कौन-से 4 बिंदु जांच से हटाए गए और क्यों?

# क्या यह जान-बूझकर की गई अनदेखी है या सिस्टम की लापरवाही?

# क्या भविष्य में जब कोई हादसा होगा तब हम इसकी भरपाई करेंगे?

> “यदि शासन सुरक्षा के 16 बिंदुओं को अनिवार्य मानता है, तो 12 बिंदुओं की जांच पुरी मानी जाएगी ? 

> “यदि यह जांच पूरी हैं, उन 12 बिन्दुओ को स्पष्ट वा सार्वजनिक किया जाय “

> ” यदि जांच पूरी नहीं हैं, तो किन चार बिन्दुओ को छोड़ा गया है और क्यों यह भी बताया जाय!

जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्ट कारण पूछे जाएं कि किन बिंदुओं की अनदेखी की गई।

इस संबंध में सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

जहां एक ओर फिटनेस शिविर का आयोजन प्रशासन की संवेदनशीलता दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर अधूरी जांच व्यवस्था प्रशासनिक गंभीरता पर सवाल खड़े करती है।

बच्चों की सुरक्षा के मामले में कोई बिंदु छोटा नहीं होता —

हर बिंदु जीवन बचा सकता है

 अब देखने वाली बात होगी कि इस पर उच्च अधिकारीयों किस तरह की कार्यवाही करते है, 

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्कूल बसों की जांच के 16 अनिवार्य बिंदु:

1. पीले रंग की स्कीम

प्रत्येक स्कूल बस को मोटरयान नियम, 1994 के नियम 114 के खंड (1-A) के अनुसार पूरी तरह पीले रंग से रंगा जाना चाहिए और आगे-पीछे “स्कूल बस” स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए।

2. खिड़कियों में क्षैतिज रॉड

बस की सभी खिड़कियों पर क्षैतिज (Horizontal) सुरक्षा रॉड लगे होने चाहिए।

3. प्राथमिक उपचार पेटी

हर स्कूल बस में प्राथमिक उपचार पेटी (First Aid Box) होना अनिवार्य है।

4. प्रशिक्षित परिचारक (अटेंडेंट)

वाहन में एक ऐसा परिचारक होना चाहिए जो बच्चों की सुरक्षा हेतु प्रशिक्षित हो, विशेष रूप से छोटे बच्चों को चढ़ाने-उतारने में मदद करने हेतु।

5. वाहन का संचालन प्रशिक्षित चालक द्वारा

चालक के पास वैध भारी मोटर वाहन ड्राइविंग लाइसेंस हो और कम से कम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।

6. स्कूल से निर्धारित बस स्टॉप के बाहर बच्चे नहीं उतारने की शपथ

चालक कोई भी बच्चा रास्ते में कहीं नहीं उतारेगा, केवल निर्धारित स्थान पर ही उतारेगा।

7. बस का स्पीड गवर्नर चालू हो

वाहन की गति सीमित करने हेतु स्पीड गवर्नर कार्यशील होना चाहिए, जिसकी सीमा निर्धारित है।

8. सीट बेल्ट (यदि सीटें हों)

यदि वाहन में सीट बेल्ट लगी हो, तो उनका उपयोग अनिवार्य है।

9. वाहन के आगे और पीछे स्कूल नाम स्पष्ट लिखा हो

स्कूल बस पर स्कूल का नाम व सम्पर्क क्रमांक स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए।

10. डोर लॉकिंग सिस्टम

बस के दरवाजे पर विश्वसनीय लॉकिंग सिस्टम होना चाहिए जिससे दरवाजे स्वतः न खुलें।

11. सीसीटीवी कैमरा और जीपीएस सिस्टम (यदि संभव हो)

सुरक्षा के लिए CCTV और GPS सिस्टम लगवाने की सिफारिश की गई है।

12. प्रेशर हॉर्न निषेध

बसों में प्रेशर हॉर्न नहीं लगे होंगे। यदि पाए जाते हैं तो उन्हें हटाया जाना अनिवार्य है।

13. वाहन की स्वच्छता और सफाई

बस को रोज़ साफ़ और सैनिटाइज किया जाना चाहिए। फर्श और सीटें साफ हों।

14. मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 56 अनुसार फिटनेस प्रमाण पत्र

सभी स्कूल बसों के पास वैध फिटनेस प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।

15. प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC)

सभी बसों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र होना चाहिए।

16. 12 वर्ष से अधिक पुराने वाहन नहीं चलेंगे

कोई भी स्कूल वाहन 12 साल से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए।

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