इंटरसीवेल के पास मे वैध घाट से भारी मशीनों से रेत उत्खनन, कानून की सीमाएं लांघता मुनाफा ?
छत्तीसगढ़ रेत अधिनियम 2019 के प्रावधानों की अनदेखी, प्रशासन मके इंटेकवेल से सटे इलाके में संचालित वैध रेत घाट से भारी मशीनों द्वारा रेत उत्खनन किया जा रहा है। भले ही घाट को खनन की अनुमति प्राप्त हो, लेकिन छत्तीसगढ़ रेत उत्खनन एवं व्यवसाय (विनियमन) अधिनियम, 2019 के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में भारी मशीनों का उपयोग सीमित और नियंत्रणाधीन होता है, विशेषकर तब जब उत्खनन संवेदनशील जल स्रोतों के निकट हो।
इंटेकवेल की सुरक्षा पर सवाल
इंटेकवेल वही जगह है जहां से हजारों नागरिकों के लिए पीने का पानी उठाया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इसके 500 मीटर के दायरे में कोई भी खुदाई जल गुणवत्ता, दबाव और सतही प्रवाह को प्रभावित कर सकती है।
क्या कहता है रेत अधिनियम 2019?
अधिनियम की धारा 4 के तहत, जल स्रोतों से 500 मीटर के भीतर रेत खनन प्रतिबंधित है, चाहे घाट वैध हो या नहीं।
धारा 8(2) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मशीनों का उपयोग केवल राज्य सरकार द्वारा पूर्व स्वीकृति प्राप्त होने पर ही किया जा सकता है।
संवेदनशील क्षेत्रों में उत्खनन को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) रिपोर्ट और जिला खनिज फाउंडेशन की अनुशंसा भी अनिवार्य है।
स्थानीयों में नाराज़गी
स्थानीय निवासीयों का कहना है, “कागज़ों में घाट वैध होगा, लेकिन इंटेकवेल से इतनी नजदीकी पर मशीन चलाना कहां तक उचित है?”
एक अन्य महिला ने कहा, “हम रोज़ वही पानी पीते हैं, और वहीं पर जेसीबी चल रही है। इससे बड़ी लापरवाही क्या होगी?”
प्रशासन पर उठे सवाल
खनिज विभाग और जल संसाधन विभाग दोनों ही मामले पर चुप हैं। न तो कोई निरीक्षण हुआ है और न ही मशीनों के उपयोग की वैधता पर कोई दस्तावेज सार्वजनिक है।
रेत घाट भले ही वैध हो, लेकिन उसका संचालन नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। जल स्रोतों के पास खनन से सिर्फ रेत नहीं निकलती, भविष्य की प्यास भी निकलती है।