गुड मॉर्निंग न्यूज़राजनंदगांव

World 📚 Day: किताबों की अद्भुत एवं रोचक दुनिया, किताबों से जिंदगी बदलती है

*- जीवन के हर पड़ाव पर और उतार चढ़ाव में किताबों से दोस्ती ने बहुत साथ निभाया*

*- आने वाली पीढ़ी को किताबों के प्रति जागरूक करने और महत्व से परिचित कराना बहुत जरूरी*

राजनांदगांव। किताबों की दुनिया अद्भुत है, किताबों से जिंदगी बदलती है। किताबों में निहित ज्ञान-विज्ञान की बातें जीवन को दिशा प्रदान करती हैं। जीवन के हर पड़ाव पर और उतार चढ़ाव में किताबों से दोस्ती ने बहुत साथ निभाया। जब भी समय मिला किताबों के पन्ने पलटे, एक अच्छी किताब आपके जीवन को बदल देने की क्षमता रखती है। यह हमारी अमूल्य धरोहर है। अब धीरे-धीरे डिजिटल इंटरनेट के युग में किताबों का डिजिटलीकरण हो गया है। लेकिन किताबों की बात कुछ अलग है। आने वाली पीढ़ी को किताबों के प्रति जागरूक करने और महत्व से परिचित कराना बहुत जरूरी है। जब भी मुझे पॉकिट मनी मिली, मैंने उनसे अपने लिए किताबें खरीदी और घर में एक छोटी सी लाईब्रेरी बना ली। ज्यादातर महापुरूषों की जीवनी स्वामी विवेकानंद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, बाबा आम्टे सहित विभिन्न किताबों का संग्रह किया। फिर एक सिलसिला सा चल पड़ा। विभिन्न अवसरों पर मित्रों एवं परिजनों ने किताबें उपहार में दी।


मोटिवेशनल, प्रेरणादायक किताबों में मेरी अभिरूचि बढ़ी, जब मैंने पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की किताब अग्नि की उड़ान और इग्नाइटेड माइंड्स पढ़ी। बिटिया जब एक साल की थी तब कुछ बोल नहीं पा रही थी, लेकिन मुझे महसूस हुआ कि कोई बात है जो बता नहीं पा रही है, स्वास्थ्य निरंतर गिर रहा था, वजन भी कम हो गया था। डॉक्टर ने बताया कि बच्ची को डाइलेटेड कार्डियोम्योपेथी नाम की गंभीर बीमारी है, जो लाइलाज है। पूरी रिपार्ट जानकर हमारे तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। इस बीमारी में हृदय पूरे शरीर में रक्त की आपूर्ति नहीं कर पा रहा था। एम्स दिल्ली में इलाज शुरू हुआ, लेकिन वह तकलीफदेह था। शिशु वार्ड में छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में केनुला लगा हुआ था। जब वे अपने घर जा रहे होते थे तब उनके चेहरों पर खुशी होती थी। तब तक मैं यह जान चुकी थी कि मेरी बच्ची का केस बिल्कुल अलग तरह का है। फिर डॉक्टर ने एक दिन मुझे से कहा कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, आप इसे ले जायें। दिल्ली से वापसी हुई। मैं फिर से ड्यूटी जाने लगी। इस बीच मैंने रोंडा बर्न की ‘द पावर” में हेल्थ वाला वाला पार्ट कई बार पढ़ी। जिसमें एक स्थान पर लिखा है। आप बीमार व्यक्ति की मदद कर सकते हैं। बीमार व्यक्ति अपनी जिन भावनाओं द्वारा स्वस्थ होने के लिए स्वयं को प्रेरित कर रहा है, आप उसके परे तो नहीं जा सकते, लेकिन आपकी शक्ति उसे स्वास्थ्य की फ्रीक्वेन्सी तक ऊपर उठा सकती है। इसी बीच लाइब्रेरी में डॉ. जॉन एफ डीमार्टिनी की किताब काउंट योर ब्लेसिंग्स, द हीलिंग पावर ऑफ ग्रेटिट्यूड एंड लव पढऩे को मिली। हार्ट की बीमारी से ग्रसित रिच डिवास का संघर्ष और आशा का संदेश जैसी किताबें मिली। मैं बहुत दुख के बावजूद सकारात्मक बनी रही। जिसमें किताबों का बहुत योगदान रहा। सात माह के बाद बच्ची ने इस बीमारी से पूर्ण रिकवरी ली। डॉक्टर ने कहा कि यह एक अद्भुत चमत्कार है। बच्ची को अब किसी भी दवाई की जरूरत नहीं है और आप ईश्वर को धन्यवाद दें।


साहित्यिक के साथ ही प्रेरणादायक किताबों में मेरी विशेष रूचि रही। धर्मवीर भारती ने तीन कालजयी कृतियां गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, अंधा युग जैसे चुनिंदा बहुमूल्य उपहार दिए। गुनाहों का देवता उपन्यास पढऩे के बाद बहुत दिनों तक उसका असर दिलो-दिमाग में बना रहा। चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कृति ‘उसने कहा थाÓ, हिन्दी साहित्य में मील का पत्थर है।

मुंशी प्रेमचंद की कथाएं, फणीश्वर नाथ रेणु का मैला आंचल पढऩा उस दुनिया में कुछ देर के लिए चले जाना जैसा है। लघु कथाओं में विशेष रूचि होने के कारण मैंने अपने अवकाश के क्षणों में वे सभी लघु कथाएं पढ़ी, जो मुझे उपहार में मिली थी। कथाओं की रोचकता और उनके अनोखे संसार से परिचित होने का एक अवसर मिला। महाश्वेता देवी, मन्नू भण्डारी, रविन्द्रनाथ टैगोर, यशवंत, अंतोन चेखव, खलील जिब्रान, मोपांसा, शरदचंद्र बहुत पसंद आयी। महाश्वेता देवी की लघु कथाएं बीज, बेहुला में सामाजिक विषमता पर प्रहार किया गया है। वहीं एक नए परिवर्तन की शुरूआत की दस्तक को कथा के माध्यम से पिरोया गया है। महाश्वेता देवी के आम जन जीवन से जुड़ी कहानियोंं के अंत भाग में शोषण के प्रति जनसामान्य का विद्रोह उभरकर सामने आता है। रशियन कथाकार अंतोन चेखव की मर्मस्पर्शी एवं संवेदनशील कहानियां पाश्चात्य कहानियों की एक दूसरी ही दुनिया में ले जाती हैं। वे व्यंयात्मक लिखते हैं, लेकिन कभी-कभी उनकी कहानियां अंतर्मन को झकझोर देती हैं। पाश्चात्य कथाकारों की कहानियों का सही तरीके से अनुवाद होने पर उनमें रोचकता बनी रहती है। मन्नू भण्डारी की छोटी-छोटी कहानियां प्रेरणादायक हैं। वही अमृता प्रीतम की कहानियां जटिल एवं जीवन की सच्चाईयों को रेखांकित करती है। हिन्दी की लघु कथाओं के अलावा विश्व की प्रसिद्ध लघु कथाओं को पढऩा बहुत ही रूचिकर रहा।


हिन्दी की कविताओं एवं शायरी, नज़म पढऩे का विशेष शौक रहा। ऐसा लगा कि जैसे सभी कवियों और शायरों ने जीवन के हर पहलू के लिए अलग-अलग कविताएं और शायरी रची हैं। जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत की ओजस्वी कविताएं, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, कलम आज उनकी जय बोल भारतीय स्वाधीनता, देशप्रेम की भावना से ओत प्रोत कविताएं बहुत भाती हैं। गालिब की शायरी दरो दीवार पर सब्ज उग आया है गालिब, हम खिजां में है और घर में बहार आयी है। इस शायरी में उनकी मस्तमौला, फक्ड़पन और दिन-दुनियां से बेखबर वाली अलहदा सी शैली प्रकट होती है। जिसमें उन्होंने अभाव में भी खुशी को प्रकट किया है।

अपने बेरोजगारी के दिनों में कविता शायरी सुनाने के लिए मित्रों को चाट गुपचुप खिलाना पड़ता था। बाद में धीरे-धीरे उन्हें भी बात-बात में कविता, शायरी सुनने की आदत पड़ गई। बशीर बद्र की शायरी ‘किसी ने जिस तरह अपने सितारों को सजाया है, गजल के रेशमी धागों में यो मोती पिरोते हैं, यही अंदाज है मेरा समंदर फतह करने का, मेरे कागज की कश्ती में कई जुगनू भी होते हैं। ‘आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा, जिस दिन से चला हूँ मैं, मेरी मंजिल पे नजर है, इन आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं दिखा। इसमें लक्ष्य को हासिल करने की प्रेरणा मिलती है।

कालेज में अध्यापन के दिनों में राजनीति विज्ञान के भारतीय एवं पाश्चात्य फिलोसाफर्स पढऩे का बहुत फायदा मिला। चाहे जॉन स्टुअर्ट मिल कि ऑन लिबर्टी हो, चाहे स्वतंत्रता समानता एवं बंधुत्व का उद्घोष करने वाला रूसो हो, साम्यवाद के प्रणेता कार्ल माक्र्स, मैकियावली, अरस्तू पढऩे से एक संतुलित विचारधारा बनी। कालेज में बच्चों को पढ़ाते समय उपहार स्वरूप बच्चों ने जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर की मीन कैम्फ दी। उस वक्त के इतिहास को समझने में यह किताब बहुत महत्वपूर्ण है। हाल ही में छोटे बदलाव के असाधारण परिणाम से जुड़ी किताब एटॉमिक हैबिट्स, लम्बे और खुशहाल जीवन का जापानी रहस्य इकिगाई पढऩे का मौका मिला। बदलते परिवेश में यह बहुत ही जरूरी है कि बच्चों का किताबों से नाता बना रहे और उनमें पढऩे की आदत बनी रहे। समय के साथ डिजिटल किताबों का प्रचलन भी बढ़ा है। बच्चों को किताबें उपहार में देकर उन्हें बचपन से किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

– लेखक –

_डॉ. उषा किरण बड़ाईक_ उप संचालक, जनसंपर्क, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)

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