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सुप्रीम कोर्ट: महाराष्ट्र में विधायकों की अयोग्यता मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई….

डमरुआ न्युज/महाराष्ट्र- महाराष्ट्र में विधायकों के अयोग्यता (डिसक्वालिफिकेशन) मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में लगातार हो रही देरी पर महाराष्ट्र स्पीकर पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कोई उन्हें (स्पीकर राहुल नार्वेकर) समझाए कि वे हमारे आदेश का उल्लंघन नहीं कर पाएंगे। कोई भी कार्यवाही महज दिखावा नहीं हो सकती।

CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच इस केस की सुनवाई कर रही है। इस मामले में स्पीकर नार्वेकर की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता, उद्धव ठाकरे की ओर से एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। वहीं, शिंदे गुट की ओर से एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में दलीलें रखीं।

  • प्रक्रिया में देरी से नाराज दिखे CJI चंद्रचूड़

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला अगले विधानसभा चुनाव से पहले आ पाएगा या नहीं, या फिर पूरी प्रोसेस नाकाम हो जाएगी।’ महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव अगले साल (2024) में सितंबर-अक्टूबर में होना है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस साल जून के बाद से इस (विधायकों की अयोग्यता) मामले में कुछ नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के शीर्ष कानून अधिकारी को स्पीकर को सलाह देने के लिए कहा है। यह भी कहा कि उन्हें (स्पीकर) मदद की जरूरत है।

  • एडवोकेट कपिल सिब्बल और एडवोकेट डॉ अभिषेक मनु सिंघवी

स्पीकर ने एक साल के लिए सुनवाई का शेड्यूल बनाया है। यह कहते हुए कि अध्यक्ष ने जिरह और साक्ष्य दर्ज करने के लिए एक लंबी समयसीमा तय की है।

  • एडवोकेट कपिल सिब्बल-

क्या यह मामला एक दीवानी मुकदमा है? दसवीं अनुसूची के तहत होने वाली कार्यवाही छोटी मानी जाती हैं। यह एक तमाशा बनता जा रहा है।

  • CJI-

 मिस्टर सॉलिसिटर, किसी को स्पीकर को सलाह देनी होगी। वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को खारिज नहीं कर सकते। वे किस तरह की समय सीमा तय कर रहे हैं? यह एक छोटी प्रक्रिया है। पिछली बार हमने सोचा था कि बेहतर काम होगा और उनसे पूछा था एक शेड्यूल निर्धारित करें। जून के बाद से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है… मामले में क्या हुआ है? कुछ भी नहीं। यह दिखावा नहीं बन सकता।

  • SG तुषार मेहता-

दसवीं अनुसूची के तहत शक्तियों का प्रयोग करने वाला स्पीकर, एक ट्रिब्यूनल है। ट्रिब्यूनल दिन-प्रतिदिन के कामकाज में दिक्कत कर सकता है।

इसके बाद बेंच ने मंगलवार 17 अक्टूबर तक स्पीकर को फैसला लेने की समय सीमा तय करने का आदेश दिया।

  • CJI-

    अगर हमें लगता है कि एक उचित समय सीमा तय नहीं की गई तो हम एक साफ आदेश पारित करेंगे।

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर पर छोड़ा था सदस्यता का फैसला

एकनाथ शिंदे गुट के 16 बागी विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को फैसला सुनाया था। इसमें कोर्ट ने बागी विधायकों की सदस्यता पर फैसला स्पीकर पर छोड़ दिया था।

वहीं, उद्धव ठाकरे गुट के नेता सुनील प्रभु ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले पर फिर से विचार करने की अपील की थी। उन्होंने याचिका में तर्क दिया था- विधानसभा अध्यक्ष मामले को जानबूझकर टाल रहे हैं।

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