जशपुर

समाज के लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलने से समाज मजबूत होगा

डमरुआ न्युज/जशपुरनगर- पूनम, सुदक्षिणा, कुसुम ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर जंगलों में कंवर जाति के निवास होने से तथा विशिष्ट जीवन शैली होने के कारण कई जातियों के नाम से भी जाना जाता है। कंवर समाज के लोग सहज, सरल, प्राकृतिक सहजीवन व्यतीत करने वाले होते हैं।
कंवर समाज की लोग अपने पुत्र, भाई, चाचा को प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पाकर भाव विभोर  हो रहे हैं स कंवर समाज के महिलाओं ने कहा कि य़ह कंवर समाज का गौरव है, मुख्यमन्त्री हमारे ही बीच से हैं,  उनके मार्गदर्शन में शिक्षा का विकास करना है ताकि कंवर समाज लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिले स.  युवाओ को नशा से दूर रखना है स. शिक्षा के अलावा कृषि की उन्नति और विकास करने से समाज के लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। जिससे समाज मजबूत होगा।
महिलाओं ने कहा कि कंवर समाज प्रकृति की गोद में रहने वाली जनजाति है। उत्तर छत्तीसगढ़ में इनकी संख्या सर्वाधिक है। सरगुजा संभाग के सभी छह जिलों के साथ बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ ,जांजगीर के साथ  कंवर समाज की छत्तीसगढ़ में है।
छत्तीसगढ़ अंचल वन बहुल क्षेत्र है तथा इसमें यहां के मूल निवासी जनजाति लोग हैं
कंवर समाज के लोग प्रकृति की गोद में सरल जीवन व्यतीत करते हैं। इनकी अपनी जीवन शैली, भाषा, संस्कृति तथा परम्पराएँ हैं। इस जनजाति लोगों की खास विशेषता है- इनका सामूहिक जीवन, सामूहिक उत्तरदायित्व और भावात्मक संबंध है। सामूहिक जीवन की चेतना तथा परस्पर के प्रति रक्षात्मक जुडाव ये दोनों बातें इतनी एकाकर हो गई है कि ये लोग अकेले जीवन या परिवार की सोच नहीं सकते हैं। यही कारण है कि वे परस्पर निःस्वार्थ व स्वभाविक रूप से मदद करते हैं।  इस जाति की अर्थव्यवस्था उन्नत समाज की अर्थव्यवस्था से अलग होती है। इनकी आवश्यकताएं सीमित होती है। ये अपनी सीमित आवश्यकताओं के लिए प्रकृति पर निर्भर रहते हैं। ये जाति कृषि, वनोपज संग्रह तथा मजदूरी करके जीवन-यापन करती है। इनकी काफी बडी संख्या वन क्षेत्रों में निवास करती है। सरकारी नितियों व प्रयासों के कारण इस जाति की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

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